कुएं में फेंकी गईं थीं 282 लाशें
एक अगस्त 1857 को अजनाला (पंजाब) के कालियांवाला कुएं में ब्रिटिश सेना ने 26वीं बंगाल नेटिव इंफेंट्री के विद्रोही सिपाहियों को निर्ममता से मार डाला था। सिर पर गोली मार कर 282 सैनिकों की लाशें कुएं में फेंकी गई थीं। 2012 में इतिहासकार सुरेंद्र कोचर के नेतृत्व में खोदाई के दौरान कंकाल, गोलियां, एपॉलेट और ईस्ट इंडिया कंपनी के सिक्के मिले थे। भारतीय वैज्ञानिकों की टीम प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, डॉ. नीरज राय, डॉ. के थंगराज और डॉ. जे एस सेहरावत शामिल थे। इन्होंने दांतों और हड्डियों से डीएनए और स्टैबल आइसोटोप विश्लेषण किया। रिजल्ट आया कि ये शहीद पंजाब के स्थानीय नहीं बल्कि गंगा मैदान (उत्तर प्रदेश, बिहार आदि) से आए सैनिक थे। शहीदों की पहचान के बाद उनके परिजनों की तलाश शुरू हुई। लेकिन, ब्रिटिश औपनिवेशिक रिकॉर्ड्स ने कोई ठोस मदद नहीं की। अजनाला के 50 शहीदों के माइटोकॉन्ड्रियल डेटा तैयार किए जा चुके हैं। अब मिलान के लिए न्यूक्लियर डीएनए पर काम हो रहा है।