ड्रोन से सुरक्षा, 45 चौराहों की होगी मॉनिटरिंग
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया कि वाराणसी कमिश्नरेट के पास उपलब्ध 10 ड्रोन कांवड़ मार्ग, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर, प्रमुख घाटों, यातायात संचालन और भीड़ प्रबंधन की निगरानी करेंगे। दो टेथर्ड ड्रोन रणनीतिक स्थानों पर तैनात रहेंगे। एआई तकनीक की मदद से मंदिर परिसर, काशी के 45 प्रमुख चौराहों, शहर की सीमाओं और पूरे कांवड़ मार्ग की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके अलावा मंदिर सहित सभी प्रतिबंधित क्षेत्रों की सुरक्षा जियो-फेंसिंग, फेस रिकग्निशन कैमरों और ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के माध्यम से और सुदृढ़ की जाएगी।
चप्पे-चप्पे पर रहेगी ‘त्रिनेत्र’ की निगरानी
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया कि शहर की सीमाओं से लेकर पूरे कांवड़ मार्ग तक लगे सीसीटीवी कैमरों और काशी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से शहरभर में स्थापित 2,575 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की 24 घंटे निगरानी की जाएगी। मंदिर के कंट्रोल रूम से 315 सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से मंदिर परिसर, दर्शन कतारों और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर कंट्रोल रूम से त्वरित निर्देश जारी कर भीड़ का प्रभावी संचालन किया जाएगा।
अबकी सावन में रोपवे के दो स्टेशनों के नीचे से गुजरेंगे कांवड़िये
इस सावन में कांवड़िये रोपवे के दो स्टेशनों के नीचे से गुजरेंगे। गिरजाघर टेक्निकल स्टेशन और गोदौलिया टर्मिनल स्टेशन का निर्माण कार्य चलने के कारण अब तक यह मार्ग बंद था। अब निर्माण सामग्री हटाने के साथ यहां सड़क तैयार कर दी गई है। गिरजाघर और गोदौलिया में रखे बड़े-बड़े गार्डर भी हटाए जा रहे हैं।
30 जुलाई से इस मार्ग को खोलने की कार्ययोजना बनाई गई है। रोपवे परियोजना के दूसरे चरण में रथयात्रा से गिरजाघर तक रोप (केबल) डालने का काम चल रहा है। सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है। ऐसे में इस बार कांवड़िये रोपवे स्टेशनों के नीचे से होकर गुजरेंगे।
महत्वाकांक्षी रोपवे परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब यह अंतिम चरण में है। उम्मीद जताई जा रही है कि सावन के बाद इसका संचालन शुरू कर दिया जाएगा। स्विट्जरलैंड के इंजीनियरों की देखरेख में निर्माण कार्य जारी है। कैंट से गोदौलिया के बीच रोपवे के पांच स्टेशन बनाए गए हैं। इसकी कुल लंबाई 3.75 किलोमीटर है।
इसका मुख्य उद्देश्य कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सुगम शहरी परिवहन उपलब्ध कराना है। यह शहरी परिवहन के लिए देश की पहली रोपवे परियोजना होगी। इस परियोजना में 29 टावर बनाए गए हैं। इसकी अनुमानित लागत 815.58 करोड़ रुपये है, जिसमें 15 वर्षों का संचालन और रखरखाव भी शामिल है। रोपवे पर कुल 150 ट्रॉली कारें चलेंगी, जो हर पांच सेकंड के अंतराल पर संचालित होंगी।
कैंट स्टेशन पर होल्डिंग एरिया में ही मिलेगा टिकट
सावन में काशी आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कैंट रेलवे स्टेशन पर होल्डिंग एरिया बनाया जा रहा है। यहां यात्री बैठकर अपनी ट्रेन का इंतजार कर सकेंगे। इसी स्थान पर जनरल टिकट की सुविधा भी उपलब्ध होगी और ट्रेनों के आगमन-प्रस्थान की जानकारी भी मिलती रहेगी। इसके अलावा एक हेल्प डेस्क भी बनाई जा रही है, जहां यात्री अपनी समस्याएं बता सकेंगे। रेल प्रशासन का अनुमान है कि सावन में प्रतिदिन करीब दो लाख यात्री कैंट रेलवे स्टेशन पर आएंगे।