आरएस यादव के जेल जाने के बाद भी परिवहन विभाग के नाम पर वसूली का खेल रुका नहीं है। एजेंसियों में वाहन खरीदने वालों से एजेंसी के कर्मचारी आरटीओ को सुविधा शुल्क देने के नाम पर दो से ढाई हजार रुपये वसूल रहे हैं। ऐसा ही एक मामला एजीआर ऑटोमोबाइल्स का सामने आया है।
वैगन आर खरीदने गए बड़ालालपुर के आरपी सिंह से कर्मचारियों ने 2200 रुपये अतिरिक्त वसूल लिए। उन्होंने इसकी शिकायत आरटीओ से की तो आरटीओ ने साफ इंकार करते हुए कहा कि उनके कार्यालय में किसी तरह का सुविधा शुल्क नहीं लिया जा रहा है।
मामले में विभाग ने एजीआर ऑटोमोबाइल्स को जिम्मेदार ठहराते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामला उच्चाधिकारियों तक भी पहुंचा है। ऐसे में अब एजीआर के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
बड़ालालपुर के शिवनगर कालोनी निवासी आरपी सिंह 27 जून को वैगन आर खरीदने गए थे। गाड़ी की एक्स शोरूम कीमत 445089 रुपये बताई गई। कहा गया कि पंजीयन कराने में आठ प्रतिशत टैक्स लगेगा। एक्स शोरूम के दाम में टैक्स जोड़ने के साथ ही 2200 रुपये अतिरिक्त जोड़ा गया।
पूछने पर बताया गया आरटीओ की ओर से यह राशि तय की गई है। वाहन खरीदने के कुछ दिनों बाद गाड़ी का नंबर आवंटित किया गया। आरपी सिंह पांच जुलाई को एआरटीओ प्रशासन अमित राजन राय से शिकायत करने पहुंचे और उन्हें बताया कि परिवहन विभाग के नाम पर उनसे 2200 रुपये वसूले गए हैं।
मामले में एआरटीओ प्रशासन अमित राजन राय ने कहा कि परिवहन विभाग की ओर से वाहनों के पंजीयन के नाम पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा रहा है। एजीआर ऑटोमोबाइल्स द्वारा पंजीयन के लिए 2200 रुपये अतिरिक्त लेने की शिकायत पर उन्हें नोटिस जारी की गई है।
तो वहीं एजीआर आटोमोबाइल्स के अधिष्ठाता राजीव गुप्ता ने कहा कि एआरटीओ की ओर से दिए गए नोटिस का जवाब दे दिया गया है। एजेंसी के कर्मचारियों द्वारा किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया गया है। अतिरिक्त वसूली का आरोप बेबुनियाद है।