आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की अग्निकर्म विधि से जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिल सकता है। इस विधि के प्रयोग से किसी तरह का कोई नुकसान शरीर को नहीं पहुंचता है। अधिकांश लोगों को इस पद्धति की खासियतों के बारे में जानकारी नहीं है इसलिए वे दर्द से लंबे समय तक जूझते रहते हैं।
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में आयोजित दो दिवसीय स्वर्ण जयंती समारोह एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम दिन जोड़ों के दर्द और उसके उपचार की विधि पर विस्तार से चर्चा के साथ कई तरह के सुझाव भी दिए गए।
कॉलेज के सभागार में आयोजित समारोह में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर के प्रो. पी. हेमंत कुमार ने बताया कि जोड़ों के दर्द से छुटकारा दिलाने में ‘अग्निकर्म’ बहुत उपयोगी है। इस विधि से सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस, कमर दर्द तुरंत कम करने के लिए पंच लौह सलाका (सोना, चांदी, तांबा, वंग एवं लोहा द्वारा निर्मित) से सेंकाई की जाती हैं। बताया कि अगर अधिक दर्द तो प्रतिदिन अन्यथा कम दर्द होने पर सप्ताह में एक या दो दिन इस विधि का प्रयोग करना जरूरी है।
मर्म चिकित्सा विधि भी इसमें बहुत कारगर है। राजकीय आयुर्वेद कॉलेज उज्जैन के पूर्व प्राचार्य प्रो. यूएस निगम ने गठिया, जोड़ों के दर्द के निवारण के लिए तेलों से मालिश के साथ ही घरेलू सेंकाई की सलाह दी। लखनऊ के प्रो. डीएन मिश्र ने बच्चों द्वारा फास्ट फूड, जंक फूड आदि का अधिक सेवन करने की वजह से इस रोग के बढ़ने की संभावना जताई।
संगोष्ठी में उत्तर प्रदेश के निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. शरद चंद मिश्र ने विभिन्न प्रकार के दर्द के लिए अल्ट्रासाउंड, एक्सरे के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बीएचयू मेडिसिन विभाग के प्रो. आईएस गंभीर ने गठिया रोग निवारण में आयुर्वेद चिकित्सा को ही बेहतर बताया।
इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसएन सिंह ने अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान डॉ. सुशील कुमार दूबे, डॉ. केके द्विवेदी, डॉ. शिवशंकर पांडेय, डॉ. ओपी सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे।