परंतु फिर भी भारतीय सेना का जवान इस बात पर गर्व करता है कि उसने भी सियाचिन में ड्यूटी निभाई है।
वर्ष 1984 में ऑपरेशन मेघदूत में भारत के हाथों से पाकिस्तानी सेना की शिकस्त के बाद जनरल मुशर्रफ काफी गुस्से में थे और उसी का बदला लेने की चाह से उन्होंने कारगिल का युद्ध किया और यहां भी उन्हें मुंह की खानी पड़ी। आने वाले समय में अब युद्ध परंपरागत तरीके से नहीं होंगे इसलिए हमें भी अपनी सेना का आधुनिकीकरण करना आवश्यक है।
साइबर अटैक और ड्रोन टेक्नोलॉजी का भरपूर प्रयोग हो रहा है। अत: अब हमें तत्काल निर्णय लेने वाले मुखिया की आवश्यकता है। इस दौरान मयंक नारायण सिंह, प्रो. एमके सिंह, खुशबू मिश्रा, मोनालिसा हाजरा आदि मौजूद रहे।