वाराणसी। शारदीय नवरात्र के चौथे दिन शिव की नगरी काशी पूरी तरह मां के जयकारों से गुंजायमान रही। दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में मां कूष्मांडा के स्वरूप के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता... के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भोर से लेकर देर रात तक मंदिर परिसर में अटूट आस्था और श्रद्धा का संगम देखने को मिला। बुधवार को मंदिर 21 घंटे तक खुला रहा।
उत्सव की शुरुआत देर रात 2:30 बजे भव्य मंगला आरती के साथ हुई। मां का पंचद्रव्यों (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से अभिषेक कर विशेष शृंगार किया गया तथा उन्हें आकर्षक स्वर्ण हार पहनाया गया। भोर में तीन बजे मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का दर्शन-पूजन शुरू हो गया। हाथों में लाल चुनरी, नारियल, गुड़हल के फूल और माला लिए भक्तों ने मां के चरणों में शीश नवाकर मनोवांछित फल और कार्यों में सफलता की कामना की। दोपहर होते-होते कतारें मंदिर परिसर से बाहर निकलकर लगभग एक किलोमीटर दूर तक लग गईं। मंदिर के मुख्य पुजारी विशेश्वर झा उर्फ सोनू महाराज ने बताया कि मां का दिन में दो बार नयनाभिराम शृंगार हुआ। भोर में पंचामृत स्नान के पश्चात संध्या काल में बेला, चमेली, गुड़हल और रजनीगंधा के ताजे पुष्पों से सजावट की गई, जिसमें मां की स्वर्णिम आभा देखते ही बन रही थी।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मद्देनजर गर्भगृह में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रखा गया था, जिससे कतारें निरंतर आगे बढ़ती रहीं। प्रत्येक श्रद्धालु को दर्शन के लिए औसतन 35 से 40 मिनट का समय लगा। व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए मंदिर के बाहर 100 मीटर तक मजबूत बैरिकेडिंग की गई थी। सुरक्षा और निगरानी के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पूरे मंदिर परिसर में 20 सीसीटीवी कैमरे सक्रिय रहे, जिनकी प्रशासनिक स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की गई। रात 12:00 बजे शयन आरती के बाद जब गर्भगृह के पट बंद हुए, तब तक लगभग दो लाख श्रद्धालु मां कूष्मांडा के दरबार में हाजिरी लगा चुके थे।