2018 में 416 शिक्षकों और 68 प्रचार्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई थी और शिक्षकों की नियुक्तियों की जिम्मेदारी उच्चस्तरीय शिक्षा आयोग को दे दी गई। इस शासनादेश के खिलाफ महाविद्यालयों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
शासन ने विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद से परिनियमावली में संशोधन करने की बता कही, लेकिन यहां भी सहमति नहीं बन सकी। विवि ने शासन को अवगत कराया। तब सरकार ने नियमों के अनुसार विवि से नियुक्तियों का अधिकार ही वापस ले लिया।