कुर्बानी का पर्व बकरीद (ईद उल अजहा) पूरी अकीदत और जोशोखरोश के साथ मनाया गया। ईदगाहों और चुनिंदा मसजिदों में विशेष नमाज अदा की गई। नमाज के बाद कुर्बानी की रवायत निभाई गई। उलेमा हजरात ने कुर्बानी के मकसद, नियम और सावधानियों पर रोशनी डाली। ईदगाहों के बाहर नमाजियों की भारी भीड़ के चलते यातायात कुछ देर के लिए रोकना पड़ा।
नमाज के बाद अल्लाह की राह में कुर्बानी पेश की गई। शहर में सत्तर हजार से एक लाख रुपये तक के बकरे कुर्बान किए गए। कुर्बानी का यह सिलसिला तीन दिनों तक चलेगा। महंगे बकरों और दुंबों की कुर्बानी की चर्चा पूरे शहर में रही। बकरीद के दूसरे और तीसरे दिन ऊंट की कुर्बानी दी जाएगी। कई मुसलिम परिवारों ने बकरीद के पहले दिन चौपायों की भी कुर्बानी दी।
मंगलवार की सुबह से ही मुसलिम परिवार के लोग बकरीद की नमाज की तैयारियों में जुटे रहे। नए कपड़ों में ईदगाहों और मसजिदों का रुख किया। बहुत से लोगों ने घरों के पास की मसजिदों में ही बकरीद की नमाज पढ़ी। कुछ लोग घर से पूरे रास्ते खास तकबीरें बुलंद करते हुए नमाज को पहुंचे। नदेसर, तेलियाबाग, दालमंडी, फातमान, अंधरापुल आदि मसजिदों में नमाजियों की लंबी कतार रही। नमाजियों ने मुल्क की तरक्की और अमनचैन के लिए अल्लाह से दुआ मांगी।
गिलट बाजार में स्थित मसजिद नवाब टोंक में मुफ्ती हारुन रशीद नक्शबंदी, ईदगाह हकीम सलामत अली पितरकुंडा में मुफ्ती-ए-बनारस अब्दुल बातिन नोमानी, मसजिद ढाई कंगूरा चौहट्टा लाल खां में हाफिज नसीम, मसजिद लंगड़े हाफिज नई सड़क में सूफी जकीउल्लाह असदुल कादरी एवं ज्ञानवापी मसजिद में मौलाना आखिर नोमानी ने बकरीद की नमाज अदा कराई। नमाज के बाद सबने गले मिलकर एक-दूसरे को ईद उल अजहा की मुबारकबाद दी। इसके बाद घरों में कुर्बानी का सिलसिला शुरू हुआ। रामनगर संवाददाता के अनुसार पंचवटी ईदगाह में पेश इमाम महताब आलम ने बकरीद की नमाज अदा कराई। सिख समाज के सरदार सतनाम सिंह ने भी मुस्लिम भाईयों के साथ नमाज अदा की। सतनाम 20 साल से ईद और बकरीद की नमाज पढ़ रहे हैं। शिया जामा मसजिद के प्रवक्त सैयद फरमान हैदर के अनुसार ईद उल अजहा पर दो दर्जन से अधिक शिया मसजिदों में नमाज अदा की गई। शाम को कई जगहों पर मजलिस का आयोजन किया गया।
ईदगाहों के अलावा मसजिदों में सुबह 6:45 बजे से 10:30 बजे के बीच ईद उल अजहा की नमाज अदा हुई। मरकजी ईदगाह लाट पर नमाज का वक्त सुबह नौ बजे मुकर्रर था लेकिन भीड़ के चलते वक्त बढ़ाना पड़ा। इसी तरह अन्य इलाकों में भीड़ के चलते वक्त बढ़ाना पड़ा। नमाज से पहले ईदगाहों और मसजिदों में ईद उल अजहा क्यों मनाते हैं, इस पर रोशनी डाली गई। इस दौरान हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माइल से जुड़े वाकये पर रोशनी डाली गई। नमाज और कुर्बानी के बाद घरों में दावतों का सिलसिला शुरू हुआ। लोगों ने गोश्त के साथ ही कई लजीज व्यंजनों का स्वाद चखा।