चाइनीज मांझा की विक्री प्रतिबंधित होने के बाद भी जिले भर में बेरोकटोक बिक रहा है।
जानलेवा साबित हो रहे चाइनीज मांझे बेचने वालों के खिलाफ पुलिस ने अब तक कोई कारगर कार्रवाई नहीं की है।
इससे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से देश भर में लगाए गए प्रतिबंध पर असर नहीं दिख रहा है।
हालांकि, पुलिस ने तीन दिन पहले जिले में अभियान चलाकर 58 लोगों को गिरफ्तार किया था। मगर, कमजोर धाराओं की वजह से उन्हें जमानत मिल गई। अब वे फिर से इस धंधे में लग गए हैं।
मकर संक्रांति नजदीक आते ही पतंगों की दूकानों पर खतरनाक मांझा बिकना शुरू हो गया है।
पिछले दिनों प्रदेश के कई शहरों में इस मांझे के चलते कई लोग जान से हाथ धो बैठे और सैकड़ों रोज घायल हो रहे हैं। वाराणसी में भी घायलों की संख्या कम नहीं है और दोपहिया वाहन सवार ज्यादा शिकार होते हैं।
खुदरा विक्रेताओं को चाइनीज मांझा साधारण मांझे से आधी कीमत में मिल जाता है। चाइनीज मांझे का एक किलो का पैकेट 250 रुपये में तथा बाजार में साधारण मांझे का 500 ग्राम का पैकेट 350 से 450 रुपये तक है।
ट्यूबलाइट्स, बल्ब आदि के कांच के बुरादे, धातु का बुरादा, अंडे की जर्दी में मिलाकर चाइनीज मांझा तैयार किया जाता है।
शहर में अहमदाबाद, सूरत, बरेली आदि जगहों से मांझा मंगवाया जाता है। धारदार मंझा परिंदों के लिए खतरा बन गया है। हजारों की संख्या में पक्षी इसी कारण मारे जाते हैं।