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पिता की डांट के डर से भागा किशोर, 42 साल बाद मिला इस हाल में, बेटे को देख मां रो पड़ी

Mon, 11 Feb 2019 10:22 AM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क,अमर उजाला,भदोही
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आपने सिर्फ फिल्मों में देखा होगा कि बचपन में घर छोड़कर भागा एक बच्चा किस तरह से सालों बाद अपने परिवार से मिलता है। मिलने के बाद भावुकता का वो पल सबकी आंखें नम कर देता है। लेकिन ऐसा रील लाइफ में नहीं बल्कि यूपी के भदोही में असल जिंदगी में हुआ है। जब 42 साल बाद एक व्यक्ति अपने परिवार से मिला, तो परिवार वाले अपने आंसू नहीं रोक पाए। देखें अगली स्लाइड्स में...
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मुरलीधर दुबे - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में औराई थानाक्षेत्र के सहसेपुर गांव निवासी मुरलीधर दुबे पुत्र स्व. सदानंद दुबे 15 साल की उम्र में पिता की डांट की डर से घर छोड़ कर भाग गए थे। उस वक्त 10वीं में फेल होने के बाद पिता की डांट की डर से 42 वर्ष पूर्व घर छोड़कर चले गए थे। घरवालों ने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। लोग बताते हैं कि पुत्र घर छोड़ने के गम में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई। 
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Rajasthan police
गुमशुदा बच्चों की बरामदगी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को उनके राजस्थान में होने की जानकारी मिली। बताया जाता है कि मुरलीधर दुबे कुछ दिन पूर्व राजस्थान के कोटा में बीमारी हालत में सड़क पर लावारिस पाए गए थे।

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back photo of police
ऐसे लोगों की सेवा करने वाली संस्था 'अपना घर आश्रम' एअरोड्रम चौराहा कोटा राजस्थान के सरंक्षण में रह रहे थे। राजस्थान पुलिस ने भदोही पुलिस से संपर्क कर उनके वहां होने की जानकीर दी। पुलिस ने इनके भाई शेषधर दुबे को सूचना देकर कोटा भेजा।
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वहां से प्रक्रिया पूरी करने के बाद शुक्रवार को कोटा से रवाना हुए उनके भाई शेषधर दूबे शनिवार को सुबह घर पहुंच गए। चौरी-चौरी एक्सप्रेस से माधोसिंह स्टेशन पर पहुंचने के बाद सभी घर गए। चार दशक के बाद बेटे को देख बुजुर्ग मां बसंती देवी संग घर के अन्य सदस्यों के आंखो से आंसू बह निकले। 
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मुरलीधर ने मीडिया से बताया कि हर बाप अपने बेटे की अच्छाई के लिये डाट फटकार लगाता है लेकिन बचपन का जनून मुझे दूर लेकर चला गया।  करीब दस साल तक दिल्ली, कोलकाता, मुंबई आदि शहरों में टहला और उसके बाद कोटा में आकर कबाड़ का काम शुरू किया। कुछ दिन कपड़ा बेचने का काम किया। मैं खुद को अपनों के बीच पाकर खुश हूं। पिता जी तो नहीं है लेकिन माता जी हैं उनकी सेवा करूंगा। सबसे खास बात रही कि चार दशक तक गांव से दूर रहे मुरलीधर गांव के हर सख्स को पहचान ले रहे थे।  
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