उपभोक्ता फोरम ने 18 साल बाद उपभोक्ता को बीमा की रकम देने का आदेश दिया है। बीमा के बाद कंपनी उपभोक्ता को बीमा की रकम देने के बजाय टरकाया जा रहा था। सात जून को उपभोक्ता फोरम ने बीमा के तीन लाख व वाद खर्च देने का आदेश दिया है।
कमच्छा निवासी विजय कुमार ने चौकाघाट स्थित एक एजेंसी से 1999 में चार लाख 26 हजार 267 रुपये में जीप फाइनेंस कराई थी। 20 अक्तूबर 1999 को एक साल के लिए लहुराबीर स्थित नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से एक साल के लिए तीन लाख का बीमा कराया था। इस बीच वह जीप से किसी निजी काम से आजमगढ़ गए थे। तीन अप्रैल 2000 को आजमगढ़ जाते समय हादसा हो गया। हादसे के बाद गुस्साए लोगों ने वाहन में तोड़फोड़ करने के साथ ही विजय कुमार के साथ मारपीट भी की। इसकी सूचना आजमगढ़ पुलिस को देने के बाद बीमा कंपनी को भी दी गई। जानकारी के बाद भी बीमा कंपनी ने वाहन नहीं हटवाया। गुस्से में लोगों ने वाहन को फूंक दिया। वाहन नष्ट होने के बाद क्लेम किया गया, लेकिन उसे धनराशि नहीं दी जा रही थी। तब उसने 14 जून 2004 को उपभोक्ता फोरम में क्लेम किया। जिसमें सुनवाई के बाद फोरम ने 30 दिन के अंदर वाहन के तीन लाख व वाद खर्च देने का आदेश दिया है। तीस दिन में पैसे न देने पर छह फीसदी ब्याज दर से धनराशि में बढ़ोतरी होगी।