धमकी भरे कॉल के माध्यम से उन पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया जाता है। यह भी बताया है कि मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन को लेकर याचिका दाखिल करने वाली महिलाओं में उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी भी वादी है और डॉ. सोहनलाल इस मामले में पैरोकार हैं। इस पूरे मामले में डीसीपी काशी आरएस गौतम ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
ज्ञानवापी मामले में सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत में अब पांच सितंबर को सुनवाई होगी। अदालत में विश्व वैदिक सनातन संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह विसेन की पत्नी किरन सिंह के अधिवक्ता मानबहादुर सिंह ने वाद दाखिल कर ज्ञानवापी परिसर में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक, सर्वे में मिले कथित शिवलिंग की पूजा पाठ के साथ परिसर हिंदुओं को सौंपे जाने की मांग की है।
इसके अलावा तब तक अदालत से यह अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश दिए जाने का अनुरोध किया गया कि आदि विश्वेश्वर की पूजा पाठ करने में अंजुमन इंतजामिया और अन्य विपक्षियों को व्यवधान डालने से रोका जाए। इसी पर आपत्ति देने के लिए कोर्ट से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने समय देने की मांग की।
इसी के साथ अंजुमन ने वादिनी की तरफ से ज्ञानवापी को लेकर दाखिल नक्शे और मस्जिद गिराने के साक्ष्य के तौर पर औरंगजेब के आदेश संबंधी पर्यटन विभाग के बुकलेट पर भी आपत्ति दाखिल पहले ही की है। इन आवेदनों का निस्तारण अभी होना ही है। इस बीच वाद पोषणीय है या नहीं इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए अंजुमन ने आवेदन दिया है, जिस पर पांच सितंबर को सुनवाई होनी है।