चंदौली जिले के शहाबगंज ब्लाक के डुमरी गांव में पूर्व प्रधान द्वारा परिवार और रिश्तेदारों का जॉबकार्ड दिखाकर भुगतान कराने के मामले की जांच की भ्रामक रिपोर्ट देने पर अपर जिला पंचायत राज अधिकारी रामउदय यादव को निलंबित कर दिया गया। प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास ने डीएम को दुबारा जांच कराकर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया।
वर्ष 2012-13 में शहाबगंज ब्लाक के डुमरी गांव के तत्कालीन प्रधान पर आरोप है कि उन्होंने परिवार और रिश्तेदारों का मनरेगा के तहत जॉबकार्ड बनाकर भुगतान करा लिया था। इसकी जांच लंबे समय से चल रही थी। बीच में मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। रिपोर्ट आने में देरी होने पर प्रमुख सचिव ने इस साल 28 फरवरी को डीएम को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने का निर्देश दिया था।
जिला पंचायती राज अधिकारी ब्रह्मचारी दुबे ने बीडीओ को मामले की जांच सौंपी थी। लेकिन किन्हीं कारणों से वह जांच नहीं कर पाए। शासन का दबाव पड़ने पर डीपीआरओ ने अपर जिला पंचायती राज अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।
एडीपीआरओ ने ग्राम पंचायत सचिव से अभिलेख आदि मांगे तो उन्होंने उपलब्ध कराने में असमर्थता जाहिर कर दी। इस पर एडीपीआरओ ने गांव पहुंचकर जांच-पड़ताल शुरू की। एडीपीआरओ ने पूर्व ग्राम प्रधान, उनके परिवार के सदस्यों एवं रिश्तेदारों के बयान दर्ज कर क्लीन चिट दे दी थी।
इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार कर मंगलवार की सुबह शासन को भेजी गई। लेकिन प्रमुख सचिव ने परीक्षा के दौरान काम करने और आरोपियों को क्लीन चिट देने पर आपत्ति जताते हुए जांच पर सवाल उठाया। उन्होंने जांच में लापरवाही मानते हुए एडीपीआरओ को निलंबित कर दिया। साथ ही, उपायुक्त मनरेगा के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम बनाकर दोबारा जांच कराने और रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया।
मनरेगा में धांधली के मामले की जांच एडीपीआरओ कर रहे थे। उनकी जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी, जिसे शासन ने भ्रामक माना है। मामले में एडीपीआरओ को निलंबित कर दिया गया है। प्रमुख सचिव ने दोबारा जांच कराने और रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। जल्द ही जांच पूरी कर रिपोर्ट दुबारा भेजी जाएगी।
ब्रह्मचारी दुबे, जिला पंचायत राज अधिकारी