स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
उन्होंने कहा कि देव, गुरु व तीर्थ दर्शन से मनुष्य पुण्य का भागी बनता है वहीं अधर्म, अश्लीलता आदि देखने से मनुष्य पाप का भागी बनता है। उसी प्रकार सुनने व बोलने से भी मनुष्य पुण्य व पाप का भागी बनता है। इसलिए पैसे से टिकट खरीद कर कोई भी व्यक्ति इस फिल्म को देखकर पाप का भागी न बने। आदिपुरुष फिल्म में पौराणिक व धार्मिक मूल्यों का उपहास उड़ाया गया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि फिल्म के पात्रों का वस्त्र व उनका संवाद अत्यंत स्तरहीन है। जहां रामचरित मानस सदैव से धर्म व मर्यादा की शिक्षा देकर हमें आदर्श जीवन जीने हेतु प्रेरित करता हैं। वहीं इस फिल्म में पौराणिक परंपरा व संस्कृति का मखौल उड़ाने के साथ ही अमर्यादित ढंग से भगवान राम, माता सीता, हनुमान जी सहित अन्य पात्रों का चरित्र चित्रण किया गया है। सिनेमा के जरिये सनातन धर्म एवं संस्कृति पर गहरा आघात पहुंचाने का प्रयास निरंतर जारी है वह किसी भी प्रकार से सहनीय नही है।