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अधिमास: 30 दिनों तक श्रद्धालु 84 किमी रोज करेंगे पैदल पंचक्रोशी यात्रा, पांचों पड़ावों के दर्शन; होगी सुरक्षा

Mon, 11 May 2026 04:21 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Panchkroshi Mandir Varanasi: काशी में 17 मई से शुरू हो रहे अधिमास को लेकर पंचक्रोशी यात्रा और मंदिरों में विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं। यूपी समेत कई राज्यों से श्रद्धालु 84 किमी की परिक्रमा में शामिल होंगे। अधिमास में स्नान, दान और पूजन का विशेष महत्व माना गया है। वहीं, जितेंद्र सिंह ने काशी विश्वनाथ और संकट मोचन मंदिर में दर्शन-पूजन किया।
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पंचक्रोशी यात्रा में शामिल लोग। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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Varanasi News: अधिमास 17 मई से शुरू हो रहा है। पूरे महीने स्नान, दान, मंदिरों में दर्शन-पूजन का विशेष फल मिलता है। इसमें पंचक्रोशी यात्रा भी निकलती है जो काफी फलदायी होती है। इस यात्रा के लिए आठ राज्यों यूपी, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान के श्रद्धालु आएंगे। श्रद्धालु रोज ही 84 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पांचों पड़ाव के देव विग्रहों के दर्शन करेंगे। 

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अधिमास इस बार श्रेष्ठ मास में ही पड़ रहा है। इसलिए यह मास दो महीने का है। शुद्ध श्रेष्ठ मास के बाद शुक्ल पक्ष से अधिमास शुरू हो रहा है जो 17 मई से लग रहा है। इसके लिए मंदिरों और पंचक्रोशी यात्रा के पड़ावों में विशेष तैयारी शुरू हो गई है। इस यात्रा में शामिल होने के लिए श्रद्धालु एक दिन पहले की घाट पर जुटने लगेंगे। हजारों की तादाद में श्रद्धालु यात्रा मणिकर्णिका घाट पर कुंड से जल लेकर संकल्प के साथ यात्रा शुरू करेंगे। 

यहां से जल लेकर श्रद्धालु ज्ञानवापी कूप जाएंगे। श्रद्धालुओं का जत्था घाटों व गलियों से होते हुए अस्सी घाट पहुंचेगा। यहां से पहले पड़ाव कंदवा स्थित कर्दमेश्वर महादेव में दर्शन-पूजन करेंगे। यहां से भीमचंडी, रामेश्वर, शिवपुर और कपिलधारा होते हुए मणिकर्णिका पहुंचकर संकल्प पूरा कर यात्रा को विराम देंगे। 

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यह यात्रा काशी की परिधि (84 कोस) की परिक्रमा मानी जाती है। करीब 84 किमी लंबी यात्रा होती है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि स्कंद पुराण में यात्राओं का उल्लेख है। इस मास में स्नान-दान और पूजन-अर्चन का विशेष महत्व है। पंचक्रोशी परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि रावण वध के बाद भगवान श्रीराम ने पंचक्रोशी परिक्रमा की थी। वहीं, द्वापर युग में भी पांडवों ने ब्रह्म दोष से बचने के लिए पंचक्रोशी यात्रा की थी। 

पंचक्रोशी परिक्रमा पथ पर अतिक्रमण : पंचक्रोशी परिक्रमा के मार्ग खराब हैं। औढ़े से भीमचंडी तक के मार्ग और यात्रा पथ पर अतिक्रमण है। सफाई नहीं है। परिक्रमा के पड़ावों पर धर्मशालाओं की स्थिति भी ठीक नहीं है। सफाई नहीं है। कर्दमेश्वर से लेकर कपिलधारा तक धर्मशालाएं हैं। कुछ धर्मशालाओं पर अवैध कब्जे हैं। तीर्थयात्रियों के लिए ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं है।

देवों के शृंगार, 31 मालपुआ चढ़ाने का विशेष फल 
अधिमास भर मंदिरों में शृंगार होगा। मंगला गौरी मंदिर के महंत नारायण गुरु ने बताया कि अधिमास में गंगा, नदी, पवित्र तालाब और सरोवरों में स्नान-दान में खासकर 31 मालपुआ दान देने और भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। सभी मंदिरों में अलग-अलग तिथियों पर शृंगार होता है। विष्णु मंदिरों में विशेष शृंगार पूजा होगी।

झूलेलाल मंदिर में शुरू हुआ अखंड गुरुवाणी का पाठ
वाराणसी। सिंधी कॉलोनी पांडेयपुर स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में तीन दिवसीय गुरुनानक देव के गुरुग्रंथ साहिब का अखंड पाठ रविवार को शुरू हुआ। सिंधी पंचायत पांडेयपुर की ओर से जीर्णोद्धार के बाद बने इस मंदिर में पाठ के साथ भजन-कीर्तन हुआ। 

भंडारे में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। सुरेश लालवानी के संयोजन में पांच लोग पाठ कर रहे हैं। 12 मई को अखंड पाठ का समापन होगा। सेवा में पंचायत के मुखिया भावनदास आहूजा, रवि घावरी, चुन्नीलाल लोकवानी, सुरेश माखिजा, राजेश, धीरज राजवानी, महेश राजवानी आदि रहे। 
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केंद्रीय मंत्री ने बाबा के किए दर्शन
वाराणसी। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और संकट मोचन मंदिर में दर्शन-पूजन किया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में पत्नी के साथ दर्शन कर कॉरिडोर को देखा। मंदिर में प्रवेश करते वक्त ज्ञानवापी परिसर की ओर नजर गई तो उसके बारे में भी जानकारी ली। संकट मोचन मंदिर में 2006 में जहां ब्लास्ट हुआ था उस जगह को भी देखा। दोपहर 4 बजे तक केंद्रीय मंत्री बाबतपुर एयरपोर्ट से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
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