इसके लिए उन्हें वर्ल्ड बुद्धिस्ट फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्टर अवार्ड से नवाजा गया। बौद्ध धर्म ग्रहण करने के सवाल पर कहा कि बौद्ध धर्म एक धर्म नहीं बल्कि जीने की एक कला है। आज विश्व में जो भी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। उससे निजात पाने के लिए बौद्ध के शरण में आना ही होगा।
कहा कि थाईलैंड से 88000 मूर्तियों का वितरण करने का लक्ष्य लेकर भारत आया हूं। यह कार्य शुरू भी हो गया है। यहां से मुंबई, औरंगाबाद, नागपुर होकर दिल्ली से थाईलैंड वापस जाएंगे। इस दौरान भिक्षु प्रियदर्शी, भिक्षु मेत्तान्द संजय मोर सहित अन्य लोग उपस्थित थे।