घाटों पर स्थित आवासीय भवनों से निकलने वाले गंदे पानी को गंगा में जाने से रोका जाएगा। कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने बुधवार को मोटरबोट से गंगा घाटों के निरीक्षण के दौरान नगर निगम को दो दिन के भीतर सर्वे कराकर ऐसे भवनों को चिह्नित करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि ऐसे भवनों के स्वामियों को ड्रेनेज के इंतजाम करने होंगे। इसके लिए उन्हें तीन दिन की मोहलत दी जाएगी।
कमिश्नर ने 13 घाटों पर पैदल चलकर और 35 घाटों का निरीक्षण मोटरबोट से किया। इस दौरान कई घाटों पर मलबा देख नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि गंगा किनारे गंदगी फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
तेलिया नाला घाट पर मंदिर से निकलने वाला पानी गंगा में गिर रहा था, जिसे रोकने की व्यवस्था करने को कहा। सक्का और गोला घाट पर गंदगी देख कमिश्नर ने शौचालयों का निर्माण कराने को कहा। साथ ही कोनिया में निर्माणाधीन धोबी घाट का काम जल्द पूरा कराने को कहा, ताकि घाटों पर कपड़ों की धुलाई रोकी जा सके।
उन्होंने दशहरा से पहले सभी घाटों की सफाई कराने को। कमिश्नर ने नगर आयुक्त को घाटों को गोद लेने वाली संस्थाओं के काम की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि जो संस्थाएं सफाई में रुचि नहीं ले रही हैं, उनकी जगह दूसरी संस्थाओं को घाट गोद दिए जाएं। इसके लिए बैंकों सहित अन्य संस्थाओं के साथ गुरुवार को बैठक करने का निर्देश दिया।
शीतला घाट पर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के एसटीपी का गंदा पानी गंगा में जाने पर कमिश्नर ने नाराजगी जताई। उन्होंने नगर आयुक्त को इकाई के अधिकारियों से बातचीत कर इसके रोकने की व्यवस्था कराने को कहा।
इस दौरान प्रह्लाद घाट पर वाटर एटीएम लगाने लगवाने, घाटों पर कूड़ादान रखवाने का भी निर्देश दिया को कहा। निरीक्षण में उनके साथ महापौर रामगोपाल मोहले भी शामिल थे।