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आचार्य पुंडरीक स्वामी: पहली बार काशी में सजी निमाई पाठशाला, देशभर के 800 युवाओं ने महसूस की ऊर्जा

Tue, 07 Oct 2025 05:56 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित निमाई पाठशाला में युवाओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सेदारी की। विश्वनाथ धाम से गंगा तक निकली पैदल यात्रा में हरिकीर्तन यात्रा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
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विश्वनाथ धाम में पूजन के दाैरान। - फोटो : अमर उजाला
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गौड़िया संप्रदाय के 38वें आचार्य पुंडरीक स्वामी की निमाई पाठशाला पहली बार काशी में लगाई गई। अध्यात्म की इस अनूठी पाठशाला में देशभर के 800 युवाओं ने काशी ऊर्जा को अंतर्मन में सहेजा। कभी कीर्तन की गूंज, कभी ध्यान की शांति, कभी हंसी, तो कभी आंसू। हर पल दिव्यता का स्पर्श युवाओं ने किया। काशी से युवाओं ने संदेश दिया कि जब भक्ति और युवा एक साथ चलें तो युग बदल जाते हैं।

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युवाओं की टोली ने चार दिवसीय यात्रा के दौरान अस्सी से पंचगंगा के तीर्थों का दर्शन पूजन किया और हरिकीर्तन के साथ ही पांच अक्तूबर को यात्रा पूर्ण हुई। शुरुआत दो अक्तूबर को पुंडरीक गोस्वामी महाराज और रेनुका गोस्वामी के सानिध्य में हुआ। 

श्री काशी विश्वनाथ धाम से गंगा तक निकली पैदल यात्रा में हरिकीर्तन करती हुई युवाओं की टोली जब निकली तो काशी की जनता भी खुद को इस उत्सवी माहौल से अलग नहीं रख सकी। अस्सी घाट पर प्रतीकात्मक होली उत्सव के दौरान गंगा के पानी और मिट्टी से युवाओं की टोली के साथ पुंडरीक गोस्वामी और रेनुका गोस्वामी ने भी जमकर नृत्य किया। 

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विश्वनाथ धाम में हुआ भव्य आयोजन

उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विधि-विधान से महाभिषेक कर बाबा विश्वनाथ से विश्व शांति और जनकल्याण की कामना की। इसके उपरांत उन्होंने शंकराचार्य चौक स्थित कैंप में भक्तों संग हरे कृष्णा हरे राम का भजन-कीर्तन किया।

इसके अलावा उन्होंने काशी के प्रमुख मंदिरों गोपाल मंदिर, बिंदु माधव मंदिर, काल भैरव मंदिर, राधा रमण मंदिर, गोपाल मंदिर चौखंभा, तुलसी मानस मंदिर और संकट मोचन मंदिर में दर्शन-पूजन किया। रात में उन्होंने पंचगंगा घाट पर भक्तों के साथ हरिनाम संकीर्तन किया। उनके भक्ति भाव और मधुर कीर्तन से संपूर्ण काशी भक्तिरस में सराबोर हो उठी।

संस्था के सिद्धार्थ तिवारी ने बताया कि निमाई पाठशाला का आयोजन पहली बार काशी की धरती पर हुआ था। इसके पहले पुरी और वृंदावन में इसके आयोजन हो चुके हैं। हर साल मार्च में प्रतियोगिता के जरिये देश भर से युवाओं का चयन निमाई पाठशाला की आध्यात्मिक यात्रा के लिए किया जाता है। इस बार 200 युवाओं ने यह परीक्षा उत्तीर्ण की। उनके लिए निशुल्क आयोजन का इंतजाम किया गया था।
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