उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विधि-विधान से महाभिषेक कर बाबा विश्वनाथ से विश्व शांति और जनकल्याण की कामना की। इसके उपरांत उन्होंने शंकराचार्य चौक स्थित कैंप में भक्तों संग हरे कृष्णा हरे राम का भजन-कीर्तन किया।
इसके अलावा उन्होंने काशी के प्रमुख मंदिरों गोपाल मंदिर, बिंदु माधव मंदिर, काल भैरव मंदिर, राधा रमण मंदिर, गोपाल मंदिर चौखंभा, तुलसी मानस मंदिर और संकट मोचन मंदिर में दर्शन-पूजन किया। रात में उन्होंने पंचगंगा घाट पर भक्तों के साथ हरिनाम संकीर्तन किया। उनके भक्ति भाव और मधुर कीर्तन से संपूर्ण काशी भक्तिरस में सराबोर हो उठी।
संस्था के सिद्धार्थ तिवारी ने बताया कि निमाई पाठशाला का आयोजन पहली बार काशी की धरती पर हुआ था। इसके पहले पुरी और वृंदावन में इसके आयोजन हो चुके हैं। हर साल मार्च में प्रतियोगिता के जरिये देश भर से युवाओं का चयन निमाई पाठशाला की आध्यात्मिक यात्रा के लिए किया जाता है। इस बार 200 युवाओं ने यह परीक्षा उत्तीर्ण की। उनके लिए निशुल्क आयोजन का इंतजाम किया गया था।