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Varanasi News: 100 साल बाद फिर जीवित हो गई नागरी प्रचारिणी, स्थापना दिवस समारोह में बोले आचार्य मिथिलेश नंदिनी

Fri, 17 Jul 2026 02:42 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: नागरी प्रचारिणी सभा के 134वें स्थापना दिवस समारोह में आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि 100 साल बाद फिर नागरी प्रचारिणी जीवित हो गई।
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नागरी प्रचारिणी सभा के 134वें स्थापना दिवस पर समारोह में शामिल अतिथि - फोटो : उज्जवल गुप्ता
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विस्तार
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नागरी प्रचारिणी सभा के 134वें स्थापना दिवस पर अयोध्या के हनुमत निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि 100 वर्षों की आयु के बाद फिर से उसी कलेवर में नागरी प्रचारिणी सभा को सूत्रपात हो गया है। सभा की स्थापना में तीन मनीषियों बाबू श्याम सुंदर दास, राम नारायण मिश्र और ठाकुर शिव कुमार सिंह को नमन करता हूं। ये उनके पुण्य का बल है कि नितांत असभ्य होते हुए इस काल में 133 वर्ष पूरे कर 134वें वर्ष में प्रवेश कर गई है। इस पारंपरिक और आर्श कथन को स्वीकार करें कि सभा सभ्यों से बनती है। हमें ये समझना कठिन नहीं होगा कि अब किसी सभा का होना या चलते रहना कितना कठिन है। हमें एक बार फिर से नवयुवकों, छात्रावासों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के परिसरों में, चलते-फिरते युवक व युवतियों से कि क्या अभी भी आप भाषा के बारे में सोचते हैं। नागरता दीर्घजीवी नहीं होती और ग्राम संस्कृति चिरंजीवनी होती है।

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हमारे समाज में कमी ये है कि हमने टांग खींचना शुरू कर दिया : हरिवंश नारायण
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि ये दुनिया की सबसे पुरानी संस्था है। पिछले 400 साल में पश्चिम ने जिस तरह की दुनिया बनाई उनके समाज के लोग नया प्रयास कर नए धरातल से नई चीज बनाते हैं। उनके पीछे समाज खड़ा होता है। हमारे समाज में ये कमी आ गई कि हम टांग खींचना शुरू कर देते हैं। हमें नागरी प्रचारिणी के साथ खड़ा होना चाहिए। पिछले महीने यहां पर प्राचीन पुस्तकों से युवाओं को जोड़ा गया। हमारे समाज में इस विषय पर आत्मचिंतन होना चाहिए कि इस सभा को बनाने वाले उन तीन छात्रों ने क्या सोचा था। पुनर्नवा नागरी प्रचारिणी सभा ने व्योमेश शुक्ल के नेतृत्व में पुरानी विद्या और नई तकनीक का अनोखा सामंजस्य हो रहा है। हमलोग इस नई सभा की हरसंभव सहायता करेंगे।

इस शोर भरी सभ्यता में सब कुछ अल्पजीवी है
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा ने कहा कि नागरी प्रचारिणी सभा में इसलिए आया हूं क्योंकि यह समय शोर भरी सभ्यता का है। सब कुछ अल्पजीवी है। व्याकरण बिखरा हुआ है। लेखन में गहराई नहीं है। भाषा में कच्चापन है। कविताएं सिर्फ लिखने के लिए आ रही हैं। आलोचना करने वाले साहित्य और समय को देखने की सम्यक दृष्टि नहीं विकसित कर पा रहे। जिस शहर में साहित्यकारों की गैलेक्सी थी, आज वहां पर साहित्य कार्यक्रम की अध्यक्षता करने वाला नहीं मिलता।

सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने कहा कि भारत सरकार के ज्ञान भारतम प्रोजेक्ट और नागरी प्रचारिणी की ओर से करीब 75 हजार पन्नों को डिजिटाइज कर लिया गया है। जो पांडुलिपियां सभा में हैं वो सब डिजिटाइज हो जाएंगी, उनका नया कैटलॉग बन रहा है। हरिवंश नारायण की किताब सभी मेहमानों को भेंट की गई। पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर उदंत मार्तंड का भारतीय डाक चित्र सभा के पुस्तकालय को भेंट किया गया।
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अंधेरे के बाद अब नए सूरज नागरी प्रचारिणी का उदय हुआ
राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु ने कहा कि महादेव और कालभैरव की तरह सभा भी काशी का तीर्थ है। मेरा सौभाग्य है कि मैं इस संस्था के पड़ोस में रहा हूं। बगल में हरिश्चंद्र कॉलेज से पढ़ाई करके निकला। अंधेरे के बाद अब नया सूरज नागरी प्रचारिणी का उदय हुआ है। भारतेंदु के आंगन में होने वाली संगोष्ठियों में शामिल होता हूं। प्रो. कृपा शंकर चौबे ने बताया कि अब समय आ गया है कि सभा भारत और संसार की दूसरी संस्थाओं के साथ हाथ मिलाकर नए संकल्प हाथ में लें।
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