नागरी प्रचारिणी सभा के 134वें स्थापना दिवस पर समारोह में शामिल अतिथि
- फोटो : उज्जवल गुप्ता
नागरी प्रचारिणी सभा के 134वें स्थापना दिवस पर अयोध्या के हनुमत निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि 100 वर्षों की आयु के बाद फिर से उसी कलेवर में नागरी प्रचारिणी सभा को सूत्रपात हो गया है। सभा की स्थापना में तीन मनीषियों बाबू श्याम सुंदर दास, राम नारायण मिश्र और ठाकुर शिव कुमार सिंह को नमन करता हूं। ये उनके पुण्य का बल है कि नितांत असभ्य होते हुए इस काल में 133 वर्ष पूरे कर 134वें वर्ष में प्रवेश कर गई है। इस पारंपरिक और आर्श कथन को स्वीकार करें कि सभा सभ्यों से बनती है। हमें ये समझना कठिन नहीं होगा कि अब किसी सभा का होना या चलते रहना कितना कठिन है। हमें एक बार फिर से नवयुवकों, छात्रावासों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के परिसरों में, चलते-फिरते युवक व युवतियों से कि क्या अभी भी आप भाषा के बारे में सोचते हैं। नागरता दीर्घजीवी नहीं होती और ग्राम संस्कृति चिरंजीवनी होती है।
हमारे समाज में कमी ये है कि हमने टांग खींचना शुरू कर दिया : हरिवंश नारायण
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि ये दुनिया की सबसे पुरानी संस्था है। पिछले 400 साल में पश्चिम ने जिस तरह की दुनिया बनाई उनके समाज के लोग नया प्रयास कर नए धरातल से नई चीज बनाते हैं। उनके पीछे समाज खड़ा होता है। हमारे समाज में ये कमी आ गई कि हम टांग खींचना शुरू कर देते हैं। हमें नागरी प्रचारिणी के साथ खड़ा होना चाहिए। पिछले महीने यहां पर प्राचीन पुस्तकों से युवाओं को जोड़ा गया। हमारे समाज में इस विषय पर आत्मचिंतन होना चाहिए कि इस सभा को बनाने वाले उन तीन छात्रों ने क्या सोचा था। पुनर्नवा नागरी प्रचारिणी सभा ने व्योमेश शुक्ल के नेतृत्व में पुरानी विद्या और नई तकनीक का अनोखा सामंजस्य हो रहा है। हमलोग इस नई सभा की हरसंभव सहायता करेंगे।