शिक्षा में आर्थिक तंगी बाधा बनने नहीं दिया था
डॉ. विनोद बिंद की सफलता उनके पिता दूधनाथ बिंद के अथक संघर्ष की मिसाल थी। सीमित आय के बावजूद उन्होंने कभी बच्चों की शिक्षा में आर्थिक तंगी को बाधा नहीं बनने दिया। दिनभर रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले दूधनाथ ने अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए लगातार मेहनत की। इसी संघर्ष का परिणाम था कि विनोद डॉक्टर बने।
परिवार की सबसे छोटी बेटी वर्तमान में बीएमएस की पढ़ाई कर रही है। बड़े भाई गुलाब बिंद, जो जेसीबी संचालन का कार्य करते हैं, ने कहा कि जिस बेटे को पढ़ाने के लिए पिता ने जीवनभर संघर्ष किया, उसी के असमय चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। दूसरे भाई दिनेश बिंद ट्रैक्टर चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि डॉ. विनोद बिंद की मौत ने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है।