सौ हत्याएं, दो सौ अपहरण। जिंदा या मुर्दा पकड़े जाने पर सिर पर बड़ी राशि का इनाम। सत्तर के दशक का यह रिकार्ड चंबल घाटी के दस्यु सरगना रहे भिंड (मध्य प्रदेश) निवासी पंचम सिंह का है। 556 डाकुओं के सरदार पंचम के आने-जाने से पहले रेल रुक जाती थी और रेल के गार्ड के सलामी देते थे।
कभी इनका नाम सुनकर लोग थर्रा उठते थे लेकिन अब वह हृदय परिवर्तन करा रहे हैं। काशी में सोमवार को उन्होंने सौ से अधिक लोगों को राजयोग के जरिए हृदय परिवर्तन का पाठ पढ़ाया।
उनका दावा है कि इस पद्धति से आतंकियों और नक्सलियों का भी हृदय परिवर्तित किया जा सकता है।
श्रीरामनगर कॉलोनी स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में ठहरे 96 साल के पूर्व दस्यु सरगना पंचम सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कई जानकारियां साझा कीं।
उन्होंने बताया, 1970 तक चंबल घाटी से लगे यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश के 25 जिलों में डाकुओं की समानांतर सरकार चलती थी।
उनके सिर पर दो करोड़ रुपये का इनाम था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पहल पर उन्होंने 1972 में समर्पण कर दिया था।
इसके बाद जेल में ही वह प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संपर्क में आ गए थे।
डाकू से राजयोगी बने पंचम ने बताया कि चाहे कितना भी क्रूर हृदय क्यों न हो, उसे परिवर्तित किया जा सकता है। मन को केंद्रित करने की पद्धति राजयोग में मिलती है।
इसे योग के जरिए आत्मावलोकन के साथ ही आत्म अनुभव के जरिए मनुष्य की मन:स्थितियां बदलने लगती हैं। स्वयं को जानने के प्रयास और मन को बस में करने के बाद ही ऐसी स्थिति आ सकती है।
वह बताते हैं कि परमात्मा एक पावर हाउस है। उससे जुड़ने के बाद ही जीवन रूपी बल्ब जलते हैं।
बातचीत के समय बीके सरोज और बीके ओएन उपाध्याय उपस्थित थे।