वाराणसी के जंगमबाड़ी निवासी फर्नीचर व्यापारी से रंगदारी मांगने के मामले में गिरफ्तार किए गए अभिषेक तिवारी और मान सिंह रावत ने शपथ पत्र दिया कि पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की इस प्रकरण में कोई भूमिका नहीं है। इसी आधार पर निलंबित किए गए दशाश्वमेध इंस्पेक्टर बालकृष्ण शुक्ला ने गायत्री का नाम मुकदमे की विवेचना के दौरान निकाल दिया।
इसे लेकर एसएसपी हैरान और खासे नाराज दिखे। एसएसपी का कहना था कि जब सर्विलांस और तफ्तीश में सब कुछ स्पष्ट था तो सह आरोपियों के शपथ पत्र के आधार पर मुख्य आरोपी का नाम विवेचना के दौरान कैसे हटा दिया गया। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट आने के बाद इंस्पेक्टर बालकृष्ण शुक्ला के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ रंगदारी मांगने का मुकदमा फर्नीचर व्यापारी की तहरीर पर 30 जून को दशाश्वमेध थाने में दर्ज किया गया था। प्रकरण में दो आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद वारंट बी के जरिये गायत्री को न्यायालय से तलब कराने की तैयारी थी।
इसी बीच सामने आया कि विवेचना के दौरान गायत्री का नाम निकाल दिया गया है तो रविवार को एसएसपी ने इंस्पेक्टर बालकृष्ण शुक्ला को निलंबित कर दिया। महकमे में चर्चा है कि इंस्पेक्टर ने गायत्री का नाम एक उच्चाधिकारी के इशारे पर विवेचना से निकाला था।