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Academy Award: काशी की नृत्यांगना, रंगकर्मी, दो शास्त्रीय गायक, वायलिन, शहनाई और दुक्कड़ वादक को सम्मान

Sat, 06 Jun 2026 10:47 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से काशी के सात संगीत मर्मज्ञों को सम्मानित किया गया। इसके नृत्यांगना, रंगकर्मी, दो शास्त्रीय गायक और वायलीन, शहनाई व दुक्कड़ वादक शामिल रहे।
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माला होंबल, जवाहर लाल, प्रो. राजेश सिंह, मंगल प्रसाद, सुखदेव मिश्रा, विजय शंकर और प्रो. राम शंकर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशी के सात संगीत मर्मज्ञों को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। इसमें बीएचयू के दो संगीत प्रोफेसर और दो छात्र रहे चुके हैं। दुक्कड़ वादन कर चुके, खाटी बनारसी कलाकार मंगल प्रसाद, मशहूर शहनाई वादक जवाहर लाल, संगीत लेखक, नृत्य और रंगमंच रंगकर्मी से विजय शंकर मिश्रा, शास्त्रीय गायक और बीएचयू में गायन विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश शाह, इसी विभाग से प्रो. राम शंकर मिश्रा, भरतनाट्यम नृत्यांगना माला होंबल, वायलिन वादक सुखदेव मिश्रा को लखनऊ में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की ओर से सम्मानित किया गया।

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अंदर की भावना को बाहर निकालती है वायलिन
वायलिन वादक सुखदेव मिश्रा ने कहा कि वायलिन एक ऐसा वाद्य यंत्र है जो आपके अंदर की हर एक भावना को बाहर निकाल सकता है। वैसे तो घर में सारंगी तबला सब कुछ था मगर पिता की इच्छा थी कि कुछ दूसरा वाद्य यंत्र बजाया जाए। ताऊ जी पंडित नारायण दास मिश्र, फिर बड़े भाई सोमानाथ मिश्र से प्रारंभिक शिक्षा ली। पीजी काशी विद्यापीठ और डबल एम म्यूज बीएचयू और चंडीगढ़ से किया। बॉलीवुड में कदम नहीं रखा लेकिन रविंद्र जैन और अनुराधा पौडवाल के साथ वायलिन बजाया है। हमारी पहचान शास्त्रीय संगीत में है।

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पहले पति और अब पत्नी को सम्मान
भरत नाट्यम नृत्यांगना माला होंबल ने कहा कि ये सम्मान पति को समर्पित कर रही हूं। पति पीसी होंबल बीएचयू में नृत्य विभाग के अध्यक्ष रहे। उन्हें 2000 में प्रदेश का और 2021 में दिल्ली का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिल चुका था। पति का निधन पिछले साल हो गया। अब बेटी के साथ लंका में ही रहती हूं। बड़ी बेटी इस विरासत को आगे ले जा रही है। भरतनाट्यम का प्रशिक्षण शंकर होंबल और गिरिजा देवी होंबल से लिया। वर्तमान में कोरियोग्राफर के तौर पर अपनी यात्रा को आगे बढ़ा रहीं हैं। 
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