बीएचयू के अंतर संकाय युवा महोत्सव ‘स्पंदन’ का उद्घाटन करने आए फिल्म अभिनेता अभिषेक बच्चन ने कहा कि वे चाहते हैं कि उनकी बेटी आराध्या भी बच्चन परिवार की बीएचयू से जुड़ी परंपरा को आगे बढ़ाए। मालूम हो कि हरिवंश राय बच्चन 1927 में बीएचयू में बैचलर आफ एजूकेशन के छात्र थे।
अभिषेक ने अपने दादा की अमर कृति ‘मधुशाला’ का जिक्र किया और कहा कि मधुशाला का पहला पाठ दादा जी ने बीएचयू में ही किया था। जूनियर बच्चन मिनटों में बीएचयू से चार पीढ़ियों का रिश्ता जोड़ गए। अभिषेक ने बीएचयू के विद्यार्थियों से वादा किया कि वे पिताजी को अगले साल बीएचयू आने को कहेंगे और बेटी आराध्या को भी दादा हरिवंश राय बच्चन की परंपरा निभाने की सीख देंगे।
जूनियर बच्चन ने माइक संभाला, पूरे खालिस अंदाज में। नौ मिनट में ही उन्होंने युवाओं, विद्यार्थियों से आत्मीयता जोड़ ली। शुरुआत उन्होंने बीएचयू और बच्चन परिवार के पुराने और प्यारे रिश्ते से की। कहा कि यहां से मेरे परिवार का प्यार का रिश्ता है, जो कभी खत्म नहीं होगा। मेरे दादाजी ने यहीं मधुशाला की रचना की और यहीं सबसे पहले उसका पाठ भी किया।
आज यहीं, बीएचयू में मैं पहली बार काशीवासियों से रूबरू हो रहा हूं। अब बचे रह गए हैं, हमारे पिताश्री। मैं उनको भी बोलूंगा कि अगले साल वो यहां जरूर आए। उन्हें कई बार आमंत्रण मिला है। उनकी चाहत भी है यहां आने की। बीएचयू से तीन पीढ़ियों से जुड़ी आत्मीयता को याद किया और कहा कि मैं बेटी आराध्या को जाकर बोलूंगा कि ये जो परंपरा बनी है बीएचयू और बच्चन परिवार की वो उसे कायम रखे
मैं चाहता हूं कि आराध्या की शिक्षा-दीक्षा भी बीएचयू में हो। इस दौरान उन्होंने इलाहाबादी अंदाज में कई दफा युवाओं को ‘भइया’ संबोधित किया। जब-जब अभिषेक ने भइया बोला, समूचा पंडाल तालियों के शोर से गूंज जा रहा था।