महाकुंभ से काशी पहुंचे नागा साधु
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महाकुंभ के बाद अखाड़ों की पेशवाई अब काशी में शुरू हो गई है। काशी के दूसरे सबसे बड़े अखाड़े श्री शंभू पंचदशनाम आवाहन अखाड़े की पेशवाई मंगलवार भगवान प्रथमेश की अगुवाई में कबीरचौरा से निकलेगी। 10 रथों पर अखाड़े के श्रीमहंत और महंत सवार होंगे। वहीं 500 से ज्यादा नागा साधु पेशवाई में शामिल होंगे।
कबीरचौरा अखाड़े में साधु-संत सुबह अपने आराध्य देव भगवान गणेश और निशान की पूजा करेंगे। खिचड़ी भोज करने के बाद पेशवाई निकाली जाएगी। अखाड़े के महामंत्री सत्य गिरि महाराज ने बताया कि आवाहन अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य मंडलेश्वर अवधूत अरुण गिरि महाराज के साथ बग्घी पर मंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत सहित अन्य पदाधिकारी विराजमान होंगे।
पेशवाई में बैंडबाजा-घोड़े आदि शामिल होंगे। पेशवाई मैदागिन, चौक, गोदौलिया होते हुए दशाश्वमेध घाट पहुंचेगी। यहां पर भ्रवान प्रथमेश और निशान की पूजा व आरती होगी। साधु-संतों का स्वागत होगा।
गुजरात का पानी नहीं पीते हैं नागा साधु
काशी के दशाश्वमेध घाट पर स्थित श्रीशंभू पंचदशनाम आवाहन अखाड़े को छठी शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने स्थापित किया था। इस अखाड़े को पहले आवाहन सरकार के नाम से जाना जाता था। सत्य गिरि महाराज ने बताया कि इस अखाड़े के आराध्य प्रथम पूज्य श्रीसिद्ध गणेश जी हैं, क्योंकि किसी भी देवता का आवाहन गणेश जी से ही करते हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात में आवाहन अखाड़े के नागा साधुओं का मुगलों से युद्ध हुआ था। मुगलों ने गुजरात के वीरलगांव के एक स्थान पर नागा साधुओं को जहर देकर मार दिया था। इसलिए नागा साधु गुजरात का पानी नहीं पीते। ऐसे ही मध्यप्रदेश के छतरपुर में भी नागा साधुओं की समाधियां हैं।