वैज्ञानिकों ने 25 प्रतिभागियों और युवा वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया। कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. यूपी सिंह ने कहा कि खाद्य पदार्थों में भारत के आत्म निर्भर होने के बाद अगली चुनौती खाद्य अपशिष्ट पदार्थों की उपयोगिता और संरक्षण की बात होती है। खाद्य और डेयरी वेस्ट जैसे छाछ, मौलेसिस अदि का उपयोग पैकेजिंग फिल्म और जैव उत्प्रेरक बनाने में किया जा सकता हैं। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. अमृता पुनिया ने बताया कि ये ट्रेनिंग प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों के शोध में काफी उपयोगी होगी।