आगमन संस्था ने शासन प्रशासन से मांग की कि नवरात्र ही क्यों मांस और शराब की बिक्री सदैव के लिए काशी अंतरगृही क्षेत्र से बाहर किया जाए। मांग के समर्थन में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राजनेता और अधिकारियों को पत्र भेजा गया।
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संस्था के डॉ. संतोष ओझा और राहुल गुप्ता ने पत्र के जरिये प्रश्न किया कि काशी धार्मिक नगरी है या पर्यटन नगरी। शिव की नगरी में धर्म की ओर से प्रतिबंधित अखाद्य वस्तुओं के बिक्री और सेवन क्यों हो।
पत्र में कहा गया है कि पिछले 4 साल से काशी को मांस मदिरा मुक्त करने के लिए चल रहा अभियान पवित्र काशी की सफलता के लिए आगमन संस्था और ब्रह्म सेना अपनी नई रणनीति पर काम करेगी। जिनको आगामी वर्ष पर्यंत होने वाले कार्यक्रमों में देखा जा सकता है।
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इस मांग के समर्थन में लगभग 2500 काशी के संत महंथ, विद्वतजन, संगीतज्ञ, शिक्षाशास्त्री, गंगा आरती करने वाली समितियां, धार्मिक और सामाजिक संगठन, चारों पीठ के शंकराचार्य, अलग-अलग शहरों के संत और प्रसिद्ध कथावाचक आ चुके हैं।