वाराणसी में बृस्पतिवार को बीएचयू के हिन्दी विभाग में अदिवासी दिवस पर आदिवासी असुरी गीत गाते छा
वाराणसी। बीएचयू के हिंदी विभाग में विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिली। युवा कलाकारों ने एक से बढ़कर एक कार्यक्रम से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। हिंदी विभाग के आचार्य रामचंद्र शुक्ल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में जैसे ही युवा कलाकार मंच पर चढ़े तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा सभागार गूंज उठा।
आदिवासी चिंतक एवं कवयित्री वंदना टेटे ने कहा कि मेरी मातृभाषा खड़िया है। हमारी भाषा में ध्वनियों का भी अर्थ होता है। हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. श्रद्धा सिंह ने कहा कि आदिवासी संस्कृति हमारे भारतीय समाज की अमूल्य धरोहर है। इसके बावजूद आदिवासी समाज गहरे सभ्यता संकट से जूझ रहा है। इस दौरान डॉ. राज कुमार मीणा, प्रो. विनय कुमार सिंह, प्रो. आशीष त्रिपाठी, प्रो. प्रभाकर सिंह मौजूद रहे।