सारनाथ। चंद्रशेखर की बेबाकी लोगों को कायल करती थी। जो उनके करीब आया उनके स्नेह और यारी का दीवाना होकर रह गया। वह दोस्तों के गुण-दोष नहीं देखते थे। हरहाल और हर कीमत पर रिश्ते का निर्वाह करते थे। उनके इन्हीं गुणों के वशीभूत होकर लोग बुधवार को शक्ति पीठ आश्रम में एकत्रित हुए। सारनाथ में जिस जगह अवधूत भगवान राम आए थे उसी अघोर टेकरी के समीप नगर निगम की भूमि पर सन 1979 में चंद्रशेखर ने आचार्य नरेंद्र देव महासम्मेलन का आयोजन किया था। यह जगह आज शक्तिपीठ के नाम से जानी जाती है। यहां चंद्रशेखर फाउंडेशन बन गया है। पूर्व प्रधानमंत्री की जयंती पर हर साल यहां लोग जुटते हैं और उनके पद चिह्नों पर चलने का संकल्प लेते हैं।
चंद्रशेखर की जयंती पर शक्तिपीठ आश्रम में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सिंह, राज्यमंत्री सुरेंद्र प्रताप सिंह, सांसद रामकिशुन यादव सहित तमाम दिग्गजों को जुटना था लेकिन कोई नहीं आया। सभा स्थल पर रखी लाल रंग की अधिकांश कुर्सियां खाली थीं। मंच पर कुछ बुजुर्ग और मंच के नीचे कुछ युवा जुटे थे। पुष्पाजंलि के बाद सभा शुरू हुई। टिंबर मर्चेंट (अब नामी प्लाईवुड कंपनी के मालिक) जेपी सिंह आयोजन में शिरकत करने कोलकाता से आए थे। युवा तुर्क ने जब जयप्रकाश नारायण के पक्ष में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का विरोध किया तो वह उनकी स्पष्टवादिता के कायल हो गए। उनसे मिले तो उनके स्नेह में बंधते चले गए। चंद्रशेखर को याद करके उनकी आंखें नम हो गईं। गुप्तेश्वर सिंह शास्त्री ने चंद्रशेखर की स्मृतियों को संजोने के लिए गेरुआ चोला धारण कर लिया। वह 1981 में यूथ कांग्रेस के पदाधिकारी थे। उसी साल चंद्रशेखर ने सारनाथ में जनता पार्टी का सम्मेलन आयोजित किया तब वह उनके संपर्क में आए। उसके बाद से उनके व्यक्तित्व के आकर्षण में बंधते चले गए। बाद में शक्तिपीठ आश्रम को संभालने के लिए गेरुआ धारण कर लिया। उनका कहना है कि चंद्रशेखर युवाओं को प्यार करते थे। फैजाबाद से आए लोकतंत्र रक्षक समिति के विजय बहादुर सिंह तो चंद्रशेखर को लोकतंत्र की रक्षा करने वाला नेता मानते हैं। उनका कहना है कि जय प्रकाश नारायण की अगुवाई में चले आंदोलन को उन्होंने ही इतना ताकतवर बनाया था। विपक्ष में बैठने वालों को सत्ता की राह दिखाई। जयंती समारोह में युवा तुर्क को पुष्प चढ़ाने वालों में बीएचयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष उपेंद्र सिंह शक्ति, देवेंद्र नारायण रघुवंशी, नवीन सिंह बबलू, रमेश सिंह, हिमांशु सिंह, यूपी कालेज के पूर्व छात्र नेता आनंदेश्वर सिंह, निशांत सिंह बोल्डर, पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षक नन्हें सिंह, सोनभद्र के जिलापूर्ति अधिकारी अक्षय प्रताप सिंह, लाल बाबा शामिल रहे। संचालन श्रीराम द्विवेदी ने किया।