वाराणसी। टेक्नेक्स-2013 में छात्र-छात्राओं ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन मैदान में अपने माडल प्रस्तुत किए। कोई ग्रामीण इलाकों के लिए कोयले पर आधारित फ्रीज बनाया था तो कोई सौर ऊर्जा का बेहतरीन माडल। किसी ने रोबोट तो किसी ने कार की नई डिजाइन तैयार की थी। छात्राें के माडलाें में भारत की मूलभूत समस्या के समाधान से जुड़े माडल भी थे। इस मौके पर चार बाल वैज्ञानिकाें को पुरस्कृत किया गया।
आईआईटी बीएचयू के छात्र शाश्वत उपाध्याय ने ऐसा फ्रीज का माडल तैयार किया था, जिसका ढांचा प्लाईवुड और उसके तीन हिस्साें में कोयले रखा गया था। कोयले पर पंप मोटर के सहारे पानी गिरने की व्यवस्था थी। कोयला का ऊपरी हिस्सा ठंडा होने के कारण अंदर का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस कम था, जिससे अंदर रखी वस्तुएं ठंडी थीं। छात्र ने बताया कि यह माडल ग्रामीण क्षेत्र के लिए काफी उपयोगी होगी, जहां बिजली नहीं है। इसके बनाने में मात्र 830 रुपये खर्च है। इसी प्रकार, शुभम, शिवम, सलोनी द्वारा बिना बिजली या मोटर के पानी के प्रेशर के सहारे पानी को टंकी में भरने की विधि प्रदर्शित की गई थी। विभिन्न स्टालों पर कुल 32 माडल प्रस्तुत किए गए थे। इसमें साइबर टेक्नोलाजी, रोबोट, हेल्थ से जुड़ी तकनीक, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा आदि के माडल शामिल थे। शाम को रोबोवार और डेथरेस खेल पर छात्र-छात्राआें ने खूब आनंद लिया। बाल विज्ञान प्रतियोगिता में सनबीन भगवानपुर के अभिनव और विशाल कुमार सिंह को प्रथम और इसी स्कूल के रितेश ओझा और सत्यार्थ ओझा को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ।