वाराणसी। अस्सी घाट पर प्रतिबंधित कछुआ सेंचुरी में अवैध खनन को लेकर गुरुवार को वन विभाग का रुख और सख्त हो गया। मुख्य वन संरक्षक ने जहां इस मामले पर रिपोर्ट तलब की, वहीं काशी वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ जीपी सिंह दोपहर बाद अमले के साथ खनन स्थल पर पहुंच गए। निरीक्षण के बाद उन्होंने अवैध खनन के लिए नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया। देर शाम निगम के अधिशासी अभियंता एससी सिंह के खिलाफ वन्य जीव अधिनियम 1972 के तहत नोटिस जारी कर दिया गया। दो दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। इसके बाद खनन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
गंगा की तलहटी में अवैध खनन की जानकारी लेने पहुंचे डीएफओ को वन दारोगा भोला प्रसाद ने बताया कि देव दीपावली पर्व के समय से ही घाट सफाई के नाम पर खनन कराया जा रहा था। डीएफओ ने पूछा कि तब खनन रोका क्यों नहीं गया? इस पर वन दारोगा का कहना था कि तब जानकारी मिलते ही खनन रोकने के लिए कहा गया लेकिन असर नहीं पड़ा। जेसीबी, पोकलैन लगाकर सिल्ट की खोदाई जारी रही। इसमें शामिल निगम के अधिकारियों की सूची भी डीएफओ ने तैयार कराई। इसमें निगम के सुपरवाइजर से लेकर एक्सईएन तक के नाम शामिल हैं। डीएफओ ने अमर उजाला को बताया कि नगर निगम के अधिशासी अभियंता एससी सिंह को नोटिस भेजा गया है। कछुआ सेंचुरी में बिना अनुमति के किस आधार पर खनन कराया जा रहा था, इसका दो दिन के भीतर जवाब तलब किया गया है। अवैध खनन कराने वालों के खिलाफ वन्य जीव अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
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अवैध खनन की आज होगी नापी
वाराणसी। काशी वन्य जीव प्रभाग के वार्डेन की टीम शुक्रवार को अस्सी घाट पर हुए अवैध खनन का सर्वेक्षण करेगी। इसमें डीएफओ भी शामिल होंगे। सेंचुरी एरिया में कितनी गहराई और कितनी लंबाई-चौड़ाई में जेसीबी से अवैध खनन किया गया है, इसकी नापी कराई जाएगी। नापी के बाद वन्य जीव प्रभाग के अधिकारी क्षति का आकलन करेंगे। यह जानकारी डीएफओ जीपी सिंह ने दी।