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गूगल बताएगा गंगा के 200 मी. के अवैध निर्माण

Sun, 20 Jan 2013 05:30 AM IST
Varanasi
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वाराणसी। गंगा के उच्चतम बाढ़ बिंदु से निर्धारित से दो सौ मीटर के दायरे में कराए गए अवैध निर्माणों को चिह्नित करने के लिए गूगल सर्च की मदद ली जा रही है। ऐसे अवैध निर्माणों के चिह्नांकन की कवायद शुरू कर दी गई है। निर्धारित सीमा के अंदर के अवैध निर्माणों की पूरी सूची, नक्शा और क्षेत्रफल के साथ विकास प्राधिकरण को 31 मार्च तक सूची सौंपनी है।
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विकास प्राधिकरण की ओर से गंगा किनारे से दो सौ मीटर के दायरे में अवैध निर्माणों को चिह्नित करने के लिए टेंडर निकाला गया था। टेंडर मथुरा की कंपनी ‘एसआरसी प्रा. लि.’ को दिया गया। हाईकोर्ट के आदेशानुसार कंपनी के निदेशक देवेंद्र चौधरी ने 1978 की बाढ़ के उच्चतम बिंदु को आधार बनाकर गूगल से पूरा मैप निकाला। इस मैप के आधार पर नदी किनारे से पैदल सर्वे कर वस्तु स्थिति का आकलन किया गया। यह आकलन रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। अब कंपनी के कर्मचारी नदी किनारे के निर्धारित बिंदु से दो सौ मीटर दायरे के अंतिम छोर तक कंट्रोल प्वाइंट लगाने के कार्य में जुटे हैं। इस कंट्रोल प्वांइट से गूगल सर्वे से मिलान कर वास्तविक क्षेत्र की गणना की जाएगी और अवैध निर्माणों का चिह्नांकन होगा। इस कार्य में किसी तरह का व्यवधान उत्पन्न न होने पाए, इसके लिए पूरी सतर्कता बरती जा रही है।माना जा रहा है कि 1978 की बाढ़ के उच्चतम बिंदु को आधार बनाकर दो सौ मीटर दायरे का सत्यापन होगा तो हजारों की संख्या में अवैध निर्माण के मामले सामने आएंगे।

कंपनी गंगा किनारे के निर्धारित दायरे का पूरा सर्वे कर अपनी रिपोर्ट विकास प्राधिकरण को सौंपेगी। विकास प्राधिकरण की सीमा से जुड़े गंगा किनारे की लंबाई लगभग 30 किलोमीटर है। इन पूरे क्षेत्रों में बने भवनों का सर्वे कर कंपनी को 31 मार्च तक रिपोर्ट देनी है।
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तेज प्रताप सिंह, सहायक नगर नियोजक, विकास प्राधिकरण
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