वाराणसी। रामनगर किले के पास उभरे रेत के टापू पर शनिवार को मूर्तिकार राम छाटपार की जयंती पर कलाकारों का जमावड़ा ज्वलंत मुद्दों को रेखांकित करने के लिए यादगार बन गया। दिल्ली गैंग रेप की घटना ने कलाकार मन को किस हद तक झकझोरा है इसकी बानगी सहज सामने आई। कुल 75 आकृतियों में से सर्वाधिक शिल्प रचना नारी शोषण-उत्पीड़न पर ही केंद्रित थीं। महंगाई और गंगा प्रदूषण जैसे विषय दूसरे, तीसरे स्थान पर थे। नारी संदर्भ और महंगाई से जुड़ी 14 आकृतियों को सर्वोच्च श्रेणी में आंकते हुए पुरस्कृत किया गया।
राम छाटपार शिल्प न्यास के आयोजन में बीएचयू फाइन आर्ट्स, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ललित कला संकाय, आईएफए के अलावा कला में कॉरियर की तैयारी करने वाले नवोदित चित्रकारों ने रेत पर आकृतियां उकेरीं। अलग-अलग समूहों में अपने-अपने सृजन से आकर्षित करने वाले कलाकारों ने ग्रुप के भी नाम से व्यवस्था पर चोट किया। स्त्री उत्पीड़न पर आकृति से चोट करने वाले एक समूह ने अपना नाम लंकेश ग्रुप रखा। आकृति पर लंकेश का चित्र रखा गया था। इसी तरह देश में समस्याओं, विसंगतियों के मकड़जाल और स्त्री विमर्श को उभारने वाले कलाकारों ने अपना नाम लेबर ग्रुप रखा था। गर्ल्स ग्रुप, एफ -7, बिंदास ग्रुप, नाइन क्रिएटर्स ने नशा, बलात्कार और बंदिशों में जकड़ी नारी के अलावा पुरुष मानसिकता को गढ़ने की कोशिश की। एकता ग्रुप ने ताबूत में महिला को दिखाया तो मछली के रूप महिला को निगलते पुरुष रूपी मगरमच्छ को निराला ग्रुप ने रेखांकित किया। रचनाकार ग्रुप ने हाल में ही बार्डर पर सेना के जवान का सिर काटने वाली घटना को रेत पर उकेर कर दुनिया में नष्ट होती मानवीय संवेदना पर चोट की। गंगा घाट के सौंदर्य को नष्ट करते नगर निगम के नाले भी कलाकारों के विषय बने।