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बीएचयू में तीन करोड़ का गोलमाल

Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
Varanasi
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वाराणसी। बीएचयू में सरकारी अनुदान में लगभग तीन करोड़ रुपये का गोलमाल हुआ है। इसका खुलासा कैग की आडिट रिपोर्ट में हुआ है। कैग ने वर्ष 2011 की आडिट रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी है। इस रिपोर्ट से विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया है।
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प्रधान महालेखाकार कार्यालय इलाहाबाद की एक टीम ने बीएचयू में 11 जुलाई 2011 से 10 सितंबर 2011 के बीच विभिन्न विभागाें की आडिट की थी। टीम ने बीएचयू के कंप्यूटर सेंटर एवं सर सुंदरलाल अस्पताल के अभिलेखाें के अवलोकन में पाया कि कीमती मशीनरी के रखरखाव के लिए वार्षिक अनुरक्षण संविदा की गई। इसके लिए 15 लाख 76 हजार 235 रुपये का भुगतान किया गया। यह आदेश बीती हुई अवधि के लिए निर्गत किया गया। इसी प्रकार विश्वविद्यालय में तीन सौ कंप्यूटराें की खरीदारी के लिए निविदा निकाली गई थी जिसमें छह फर्मों के कोटेशन प्राप्त हुए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें एक फर्म को मानकाें की अनदेखी कर सप्लाई का आर्डर दे दिया गया, जबकि एक ब्रांडेड कंपनी ने उससे सस्ते और उचित मूल्य पर सप्लाई के लिए टेंडर दिया था। इस फर्म से एक करोड़ छह लाख रुपये का कंप्यूटर अनियमित तरीके से खरीद लिया गया।
कैग ने रिपोर्ट के भाग दो में कहा है कि बीएचयू को ओबीसी ग्रांट के लिए एक करोड़ 18 लाख रुपये सरकार से प्राप्त हुआ था जिससे बिजली बिल का भुगतान कर दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार 2008 से 2010 तक पीएमटी सेल के प्रभारी प्रो. आरके गोयल को वाहन भत्ता के मद में एक लाख 29 हजार रुपये का अनियमित तरीके से भुगतान किया गया। विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार जिस अधिकारी को वाहन प्रदान किया जाता है उसे परिवहन एवं वाहन भत्ता का भुगतान नहीं किया जाता। इसी प्रकार गांधी स्मृति महिला छात्रावास के निर्माण पर प्रतिबंध के बावजूद 17 लाख 83 हजार का लकड़ी कार्य कराया गया। बैंक के बचत खाता में जमा राशि को चालू खाता में जमा कराने से 21 लाख 22 हजार रुपये के ब्याज की हानि हुई है। इस प्रकार अन्य मदों में भी गड़बड़ी पकड़ी गई है। यह मामला तब सार्वजनिक हुआ है जब वकील अंशुमान त्रिपाठी ने आरटीआई के तहत बीएचयू से कैग रिपोर्ट प्राप्त की। वकील ने केंद्रीय सर्तकता आयुक्त को पत्र भेज बीएचयू में भ्रष्टाचार के मामले की जांच की मांग की है।
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कोट :-
कैग ने जिन विभागों की आडिट में गड़बड़ी पाई है उनसे स्पष्टीकरण और रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद जवाब भेजा जाएगा। जहां तक गड़बड़ी पकड़े जाने का सवाल है तो यह मेरे कार्यकाल का नहीं है।- प्रो. जीएस यादव, कुलसचिव, बीएचयू
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