वाराणसी। सोशल मीडिया से नई चुनौती पैदा हुई है। विचारहीन राजनीतिक दलों के कारण लोग अलग-अलग मुद्दों को लेकर खुद सड़क पर उतर रहे हैं। यह लोकतंत्र और पत्रकारिता दोनों के लिए चुनौती है। इस नई चुनौती से निपटने के लिए ठोस पहल की जरूरत है। ये विचार चंद्र कुमार मीडिया फाउंडेशन की ओर से रविवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में आयोजित संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार अजय उपाध्याय ने व्यक्त किए।
लोकतंत्र की चुनौतियां एवं पत्रकारिता विषयक संगोष्ठी में श्री उपाध्याय ने कहा कि आजादी के बाद देश का संविधान बनाने समय लोगों ने पश्चिम की तरफ तो देखा लेकिन अमेरिका में प्रेस को जो अधिकार है, उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। हमारे यहां जो अधिकार आम आदमी को है वही प्रेस को भी है। यह एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि नया सोशल मीडिया श्रोत और रिसीवर दोनो है। इसमें वेरीफिकेशन की गुंजाइश नहीं है। इसमें तकनीकी एवं काल खंड का दबाव काम कर रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए ठोस पहल की जरूरत है। प्रारंभ में विषय स्थापना करते हुए वरिष्ठ पत्रकार संजय अस्थाना ने कहा कि देश में जो योजनाएं संचालित हैं, वे लोक की बजाय तंत्र द्वारा बनाई गई हैं। उन्होंने इस मौलिक समस्या पर विचार की आवश्यकता जताई। उन्होंने भ्रष्टाचार, महंगाई आदि मसलों पर संसद एवं मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाये। गोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ला, समाजवादी चिंतक विजय नारायण सिंह, प्रो. एमपी सिंह, प्रो. हरिकेश सिंह एवं डा. अनिल उपाध्याय आदि ने भी विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत गोष्ठी के आयोजक वरिष्ठ पत्रकार राजीव सिंह ने और संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार ने किया।