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कौन नाथेगा इन नालों को

Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
Varanasi
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वाराणसी। काशी के लक्खा मेले में शुमार विश्वविख्यात ‘नाग नथैया’ से 17 नवंबर को एक बार फिर नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने का संदेश दिया जाएगा। लीला में नाग तो नाथ लिया जाएगा लेकिन गंगा को डंसने वाले नाग रूपी नाले जस के तस रह जाएंगे। माना जा रहा है कि जब तक अस्सी से राजघाट के बीच गंगा में धड़ल्ले से बहाए जा रहे नालों को नहीं रोका जाएगा, तब तक पतित पावनी को निर्मल बनाना पत्थर पर दूब उगाने के ही बराबर होगा।
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नाग नथैया की पूर्व संध्या पर भी गंगा में अवजल उलीचने का क्रम नहीं रुका। शहर के दक्षिणी हिस्से का सीवर नगवा नाले से गंगा में बहाया गया। इसी तरह, शिवाला नाले को भी पांच बजे भोर में ही खोल दिया गया। हालांकि इस नाले को डायवर्ट कर नगवा नाले में मिलाने के नाम पर लाखों रुपये पहले ही खर्च किए जा चुके हैं लेकिन वह भी पानी में बह गया। राजेंद्र प्रसाद घाट पर एसटीपी के बावजूद सुबह सात बजे के बाद तक नाले से गंगा में अवजल उलीचा जाता रहा। राजेंद्र प्रसाद घाट के सीवर का अवजल दशाश्वमेध घाट तक फैलने से स्नान के लिए देश के अलग-अलग इलाकों से पहुंचे श्रद्धालुओं को नाक दबाकर बाहर निकलते देखा गया। घाट किनारे दुर्गंध फैलने से पर्यटकों को घाट मार्ग से गुजरने में जबरदस्त दिक्कत हुई। गंगा सेवा अभियानम से जुड़े रमेश चोपड़ा के मुताबिक, अस्सी से राजघाट के बीच परोक्ष-अपरोक्ष रूप से दो सौ से अधिक नाले बह रहे हैं। जब तक शहरी और औद्योगिक नालों का गंगा में बहाव नहीं रोका जाएगा, तब तक निर्मलता के उद्देश्यों की पूर्ति नहीं हो सकती।

कोट
नालों के अवजल को गंगा की सीमा से पहले भंडारित कर शोधित करने की कारगर योजना बनाई जानी चाहिए। जब तक ठोस प्रणाली पर आधारित संयंत्र नहीं लगेंगे तब तक गंगा में अवजल गिरने से नहीं रोका जा सकता। - प्रोफेसर यूके चौधरी, नदी वैज्ञानिक (पूर्व निदेशक गंगा प्रयोगशाला, बीएचयू)
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शाही बजड़ा सजा, कदंब से कूदेंगे कान्हा
वाराणसी। तुलसी घाट पर गंगा की मध्यधारा में 17 नवंबर की शाम चार बजे होने वाली नाग नथैया के लिए कुंवर अनंत नारायण सिंह का शाही बजड़ा सजने लगा है। श्यामलाल मांझी और उनकी टीम के सदस्य सुबह ही संकट मोचन मंदिर परिसर से कदंब का पेड़ काटकर घाट पर गाड़ने के लिए लाएंगे। कदंब का पेेड़ गंगा किनारे रस्सा के सहारे गाड़ कर बांधा जाएगा। उसी पेड़ की डाली से भगवान कृष्ण गंगा में बनाए गए जमुना रूपी दह में गेंद ढूंढने के लिए कूदेंगे। लीला का उस दृश्य में कालियानाग के फन पर बंशी बजाते हुए कान्हा के स्वरूप की झांकी देखने के लिए देश-दुनिया के तमाम पर्यटकों को बेसब्री से इंतजार है।
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