सुल्तानपुर के लिए जरूर भेजें
एक्सक्लूसिव
मिर्जामुराद के पूर्व थानाध्यक्ष, कांस्टेबल के खिलाफ कार्रवाई
मानवाधिकार आयोग ने 19 सितंबर तक रकम देने को कहा
अजय राय
वाराणसी। मिर्जामुराद थाने में गूंगे-बहरे किशोर के दैहिक शोषण की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तीन लाख रुपये हर्जाना देने का निर्देश दिया है। सक्षम अधिकारी के अभिभावकत्व में हरजाने की रकम को राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपाजिट करने को कहा है। बालिग होने पर उसे इसका भुगतान किया जाएगा। सरकार को उसे रोजगारोन्मुख शिक्षा दिलानी होगी। सरकार को इसका बंदोबस्त करके 19 सितंबर को आयोग को सूचित करना है। थानेदार और कांस्टेबल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है।
लगभग 15 साल का गूंगा-बहरा किशोर भटकता हुआ मिर्जामुराद थाने में पहुंचा। उसके घर का पता लगाकर भेजने के बजाय लगभग चार महीने तक उससे थानेदार और सिपाही उससे सेवा कराते रहे। दिन भर वह पुलिस वालों की सेवा करता और रात को जो भी मिलता खाकर थाने में ही सो जाता था। शराब के नशे में धुत सिपाही अंजनी कुमार पासवान ने 25 अगस्त को उससे मारपीट की। आरोप है कि उसने उसका दैहिक शोषण भी किया। मानवाधिकार एवं जननिगरानी समिति की मैनेजिंग ट्रस्टी श्रुति ने 27 अगस्त को ईमेल से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत की। आयोग ने मामले की जांच कराई। डीपीजी ने 17 अक्टूबर 2011 और चार जनवरी 2012 को लिखे पत्र में किशोर के यौन शोषण की बात खारिज कर दी। आयोग ने ज्यादा समय तक किशोर को थाने में रखने को भी हिंसा और मानवाधिकार का हनन माना और मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी की। डीजीपी को किशोर के पुनर्वास के बारे में जवाब तलब किया। डीजीपी ने आयोग को बताया कि किशोर के रामनगर चाइल्ड लाइन से नेताजी सुभाषचंद्र बोस सेवा समिति जगदीशपुर, सुल्तानपुर भेज दिया गया है। गृह सचिव (मानवाधिकार) ने 21 मार्च और 30 मई को आयोग को भेजे पत्रों में कहा कि थानाध्यक्ष और कांस्टेबल के खिलाफ कार्रवाई की गई है लेकिन किशोर के परिजनों के नहीं मिलने पर मुआवजा नहीं दिया जा सका। इस पर आयोग ने किसी सक्षम अधिकारी को अभिभावक बनाकर मुआवजे की रकम जमा कराने को कहा है। मानवाधिकार आयोग के एनजीओ कोर ग्रुप के सदस्य डा. लेनिन का कहना है कि जांच में लीपापोती की गई है। उन्होंने जांच और दोषी पुलिस वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा विवरण मांगा है।