वाराणसी। ज्योतिष पीठाधीश्वर एवं द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने राष्ट्रीय नदी गंगा की निर्मलता, अविरलता तथा उसे प्रदूषणमुक्त रखने के प्रयासों की उपेक्षा पर क्षोभ व्यक्त किया है। कहा है कि गंगा का मुद्दा राष्ट्रीय है। इसकी उपेक्षा बड़ी राष्ट्रीय क्षति है। कहा है कि जनता गंगा के प्रति जागरूक हो जाए तो राजनीतिज्ञों के सारे मापदंड उलट जाएंगे।
कहा है कि राममंदिर मुद्दे की उपेक्षा ने पंथ निरपेक्षवादियों की जड़ें हिला दी थी। प्रदेश में कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने थे अन्य प्रदेशों में भी परिवर्तन की आंधी चली थी। उन्होंने कहा है कि गंगा आस्था की दृष्टि से पूरे देश को जोड़ती है। उत्तराखंड से बंगाल तक की करीब 35 करोड़ जनसंख्या भौतिक और अध्यात्मिक दृष्टि से गंगा से जुड़ी हुई हैं। आस्था और एकता की प्रतीक गंगा की उपेक्षा की जा रही है। अविरलता को रोकने के लिए बांध बनाए जा रहे हैं। इसके जल की गुणवत्ता समाप्त की जा रही है। ग्वालियर से भेजे गए फैक्स संदेश में उन्होंने लिखा है कि प्रधानमंत्री यदि गंगा की अविरलता और स्वच्छता के लिए सुविचरित योजना लाते हैं और कार्यान्वित करते हैं तो हम चाहेंगे कि वे दीर्घकाल तक प्रधानमंत्री बने रहें।