वाराणसी। जल त्याग कर गंगा तपस्या कर रहे युवा तपस्वी ब्रह्मचारी कृष्ण प्रियानंद के हठ के आगे मंगलवार को भी प्रशासन बेबस नजर आया। उन्हें अस्पताल ले जाने की सारी कोशिशें नाकाम रहीं। उनकी एक ही धुन है कि पहले पीएम गंगा के मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करें। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से बातचीत के बाद पुलिस टीम उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट देने की बात कहकर बैरंग लौट गई।
लालीघाट स्थित तपस्थल पर दूसरे दिन भी पुलिस और प्रशासन की नहीं चली। नेट पर विभिन्न अखबारों की खबरों पर नजर डाल रहे तपस्वी की भौंहें अचानक डाक्टरों की टीम को देखकर तन गईं। हालांकि, उन्होंने कुछ कहा नहीं। उनके स्वास्थ्य की जांच के बाद चिकित्सकों का दल कमरे से बाहर निकल गया। तपस्वी को मनाने पहुंचे भेलूपुर इंस्पेक्टर अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके। ब्रह्मचारी ने उन्हें टका सा जवाब दिया कि उनकी तपस्या में खलल न पैदा करें। वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और अस्पताल नहीं जाना चाहते। इससे पहले जब समस्या का समाधान निकालने के लिए पुलिस और चिकित्सक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से बातचीत कर रहे थे तभी उन्होंने पत्र लिखकर कह दिया था कि डाक्टरों और पुलिसकर्मियों को उनके कमरे तक न आने दें। वह किसी भी कीमत पर अस्पताल नहीं जाएंगे। उधर, सुबह घबराहट और पेट में जलन की शिकायत से कुछ देर तक वे परेशान रहे लेकिन लोगों के साथ गंगा तपस्या पर चर्चा करते रहे।
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कृष्ण प्रियानंद को लेकर सतर्क रहे गंगा प्रेमी
वाराणसी। ब्रह्मचारी कृष्ण प्रियानंद को अस्पताल ले जाने की कोशिशों को लेकर गंगा प्रेमी सुबह से ही काफी सतर्क रहे। वह किसी भी कीमत पर प्रशासन को कामयाब नहीं होने देना चाहते थे। युवा तपस्वी के कमरे के पास स्थित हाल में बैठकर लोग दिनभर इस मुद्दे पर चर्चा करते रहे। गंगा प्रेमी डा. राकेश चंद्र पांडेय, यतींद्रनाथ चतुर्वेदी और डा. गिरीश तिवारी का कहना था कि प्रशासन की ओर से सोमवार को उठाए गए को देखते हुए वे सभी सतर्क हैं। जब तक प्रशासन पीएम तक पाती नहीं पहुंचाता और उसका जवाब नहीं आ जाता तब तक सतर्कता बन रहेगी।