मुंह से दवा लेने के आश्वासन पर सानंद की नली निकाली गई
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। केंद्र सरकार की अपेक्षा और प्रशासन की ओर से बार-बार तपस्या में डाली जा रही बाधा से कुपित गंगा प्रेमी भिक्षु ने मंगलवार को नली से तरल भोज्य पदार्थ लेना भी बंद कर दिया। उन्होंने ड्रिप भी निकलवा दी। अब वे सिर्फ भागवत कथा का श्रवण करते हुए गंगा तपस्या में लीन हैं। वहीं स्वामी सानंद द्वारा जल में मिला कर दवा आदि का सेवन करने का आश्वासन देने पर चिकित्सकों ने उनकी नली निकाल दी। नली से उन्हें दिक्कत भी हो रही थी। बाबा नागनाथ भी ड्रिप लगवाने के पक्ष में नहीं हैं। वे सिर्फ जल ग्रहण कर रहे हैं।
कबीरचौरा अस्पताल के तपस्या वार्ड में गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए तपस्या कर रहे गंगा भिक्षु ड्रिप न लगवाने और नली से आहार लेना भी बंद करने के कारण शाम तक एकदम निढाल नजर आए। दोपहर में अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें जबरदस्ती दूध देने का प्रयास किया गया लेकिन स्वामी सानंद के हस्तक्षेप पर चिकित्सक पीछे हट गए। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. डीबी सिंह ने बताया कि गंगा प्रेमी भिक्षु ने ड्रिप निकाल दी है और वे नली से तरल पदार्थ भी नहीं ले रहे हैं। स्थित और खराब होने पर अगर वे बेहोश हो गए तो दवा देने में दिक्कत होगी। इसलिए डाक्टरों ने उनके हाथ में वेनप्लान लगा दिया गया है। ताकि समय पर उन्हें दवाएं दी जा सकें। कहा कि सानंद जी के आग्रह पर नली हटा दी गई है। वे मुंह से दवा लेने पर राजी हो गए हैं। जबकि नागनाथ ने भी ड्रिप नहीं लगवाई। वे पानी पी रहे हैं। इसकी रिपोर्ट डीएम और सीएमओ को भेज दी गई है।
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भिक्षु और नागनाथ होंगे बीएचयू रेफर
वाराणसी। कबीरचौरा अस्पताल में गंगा तपस्या कर रहे गंगा प्रेमी भिक्षु और नागनाथ को किसी भी समय बीएचयू रेफर किया जा सकता है। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. डीबी सिंह ने जिलाधिकारी और सीएमओ को दोनों की नाजुक हालत से अवगत कराते हुए उन्हें बीएचयू में भर्ती कराने की संस्तुति की है। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर किसी भी समय दोनों तपस्वियों को बीएचयू रेफर किया जा सकता है।