गंगा पर अधूरी वार्ता शीघ्र पूरी करें प्रधानमंत्री:उमा
वाराणसी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गंगा पर बांध कतई स्वीकार्य नहीं। जनाकांक्षाओं का हवाला देकर बिजली उत्पादन और विकास की आड़ में राष्ट्रीय नदी गंगा को बांधकर जनभावनाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। अगले वर्ष लगने वाले महाकुंभ के दौरान साधु-संतों के सिर पर गंगाजल की जगह गंदा जल आए यह स्वीकार नहीं होगा। मां गंगा की अविरलता और निर्मलता से कम हमें कुछ भी मान्य नहीं।
इस बीच 4.45 बजे भाजपा नेत्री उमा भारती रविवार की शाम शंकराचार्य घाट पहुंचीं और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलीं। वहां गंगा भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री इस गफलत में न रहें कि एक बुजुर्ग संत गंगा के लिए जूझ रहा है, बलिदानी तपस्वियों की यहां कमी नहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री 17 अप्रैल की अधूरी वार्ता को किसी निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए अविलंब स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को आमंत्रित करें। चेताया कि गंगा तपस्वियों के साथ कोई अनहोनी हुई तो इसके लिए केंद्र जिम्मेदार होगा। राज्य सरकार भी इस जिम्मेदारी से विमुख नहीं हो सकती। स्वामी जी और साध्वी उमा भारती ने करीब सवा घंटे तक गंगा अभियान पर मंत्रणा की।
मूक-बधिरों ने निकाली रैली
वाराणसी। अविरल-निर्मल गंगा के लिए रविवार की सुबह मूक-बधिरों ने रैली निकाली। राजेंद्र प्रसाद घाट से निकली रैली शंकराचार्य घाट तक गई। इसमें शामिल लोग गंगा ध्वजा और गंगा की दयनीय स्थिति पर केंद्रित नारे लिखे तख्तियां लिए थे। वाराणसी बधिर सोसाइटी के तत्वावधान में निकली रैली के शंकराचार्य घाट पहुंचने पर साध्वी पूर्णांबा और ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद ने संकेतों में उन्हें गंगा अभियान की जानकारी दी। इसमें सोसाइटी के सचिव पिंटू कुंडू, अश्विनी राय आदि भी शामिल थे।