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जल परिवहन से दूर होगा बिजली संकट

Sun, 05 Oct 2014 05:31 AM IST
Varanasi
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वाराणसी। बिजली घरों में कोयले की कमी की वजह से बिजली संकट से जूझते प्रदेश को आने वाले समय में इलाहाबाद-हल्दिया जलमार्ग चालू होने से बड़ी राहत मिल सकती है। गंगा में जल परिवहन से पर्यटन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने के साथ ही बिजली संकट से निजात की उम्मीद भी बढ़ी है। जल परिवहन के जरिये कोयले की आपूर्ति में सहूलियत को देखते हुए गंगा किनारे 21 पावर प्लांट लगाने के प्रस्ताव आए हैं। इनमें दस बिजली घरों के लिए जमीन अधिग्रहण सहित अन्य प्रक्रियाएं शुरू हो गई हैं। इनके लिए इनलैंड वाटरवेज अथारिटी आफ इंडिया (आईडब्ल्यूएआई) से सालाना 30 हजार टन कोयले की ढुलाई पर सहमति भी बन गई है।
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गंगा में जल परिवहन के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने के मूर्तरूप लेते ही नदी के रास्ते माल की ढुलाई शुरू हो जाएगी। कोयले की ढुलाई-आपूर्ति सुगम देख सरकारी और निजी कंपनियां गंगा किनारे 21 पावर प्लांट लगाने जा रही हैं। इलाहाबाद के मेजा, करछना के अलावा बरौनी, बाड़, फरक्का सहित 10 स्थानों पर थर्मल पावर प्लांट लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इनके अलावा 11 स्थानों पर सुपर पावर प्लांट लगाने की योजना है। एक सुपर पावर प्लांट से तीन हजार से चार हजार मेगावाट बिजली उत्पादन हो सकेगा। इन पावर प्लांटों के लिए अनुमानत: 70 हजार टन कोयले की आवश्यकता होगी। फिलहाल हल्दिया तक बड़े मालवाहक जहाज समुद्र के रास्ते उड़ीसा के अलावा इंडोनेशिया से कोयला लेकर पहुंचते हैं। 1620 किलोमीटर लंबे हल्दिया-इलाहाबाद जलमार्ग चालू होने के बाद झारखंड की खदानों से कोयले की ढुलाई भी इसी रूट से होने लगेगी। हल्दिया-इलाहाबाद प्रोजेक्ट के निदेशक प्रवीर पांडेय ने बताया कि पावर प्लांटों के लिए गंगा के रास्ते फिलहाल 30 हजार टन कोयले की ढुलाई पर सहमति बन चुकी है।
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