वाराणसी। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण निशेष कुमार की अदालत ने हैसियत प्रमाण पत्र के लिए रिपोर्ट लगाने के नाम पर साढ़े तीन सौ रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार तत्कालीन लेखपाल मुन्ने खां को दोषी पाते हुए चार वर्ष के कारावास की सजा और आठ हजार का जुर्माना लगाया है। प्रकरण जौनपुर जिले के मछलीशहर तहसील के कुडरिया गांव का है।
एडीजीसी मुन्ना लाल यादव के मुताबिक कुडरिया निवासी शिकायतकर्ता रमेश चंद्र को पंपिंग सेट लगाने के लिए हैसियत प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। 27 सितंबर 2002 को उसे हैसियत प्रमाण पत्र जारी भी हो गया। इस बीच उसके नष्ट हो जाने पर 8 अक्टूबर 2002 को तहसीलदार को शिकायत कर्ता ने आवेदन पत्र दिया। लेकिन लेखपाल ने आख्या लगाने के लिए साढ़े तीन सौ रुपये रिश्वत मांगी। शिकायत कर्ता ने कहा पहले पांच सौ रुपये इसी कार्य के लिए दिया था। तब लेखपाल ने कहा कि दूसरी बार रिपोर्ट देनी है इसलिए साढ़े तीन सौ देने पर ही रिपोर्ट लगेगी। 24 अक्टूबर 2002 को सतर्कता अधिष्ठान ने शिकायती आवेदन के आधार पर ट्रेप टीम गठित कर 25 अक्टूबर को भू राजस्व पवारा के आफिस में दरी पर बैठे आरोपी लेखपाल को शिकायतकर्ता से साढ़े तीन सौ रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। अदालत ने विचारण के बाद आरोपी लेखपाल को दोषी पाया। लेखपाल ने सजा के सवाल पर कहा कि वह रिटायर हो चुका है और काफी वृद्ध है, पत्नी नही हैं और दया का अनुरोध किया। अभियोजन ने कहा कि भ्रष्टाचार की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सहानुभूति नहीं अपनाई जानी चाहिए। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण की धारा 7 व 13-2 के तहत चार वर्ष की कैद व आठ हजार के जुर्माने से दंडित किया।