फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कान्हा के रास से दक्ष यज्ञ तक को नृत्य में पिरोया

Mon, 31 Mar 2014 05:32 AM IST
Varanasi
विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। राजेंद्र प्रसाद घाट पर रविवार की रात कथक नृत्य की तिहाइयों में कान्हा के रास से लेकर दक्ष के यज्ञ तक की अवतारणा की गई। मौका था कथक महोत्सव का। प्रसिद्ध कथक नर्तक बिरजू महाराज ने नृत्य के भावों में आसपास के परिदृश्यों को पिरोकर संगीत प्रेमियों को मुग्ध किया। यह कार्यक्रम नटराज संगीत अकादमी की ओर से आयोजित किया गया था।
विज्ञापन

प्रसिद्ध कथक नर्तक के पहुंचते ही जहां घाट की सीढि़यां संगीत रसिकों से पट गईं, वहीं तमाम देसी-विदेशी पर्यटकों का भी जमावड़ा लग गया। शुरुआत हुई जबलपुर से आई नीलांगी कलंत्रे के नृत्य से। उन्होंने तीन ताल में कृष्ण वंदना से आमद की। भावपूर्ण नृत्य में दक्ष यज्ञ की उनकी प्रस्तुति सराही गई। इसमें उन्होंने थाट, टुकड़े के अलावा निकास की चालें और पांरपरिक परनें भी पेश कीं। ठुमरी की बंदिश- मिल जावे नंद को ढोटा... पर भी उन्होंने नृत्य किया। तबले पर लोकेश मालवीय, गायन अरुणा परांजपे, हारमोनियम -जमुना वल्लभदास, बांसुरी पर राकेश ने संगत की। इनके बाद दिल्ली से आई शिखा खरे ने अपनी विशेष मुद्राओं, भावपूर्ण इशारों से हर किसी का ध्यान खींचा। पं. बिरजू महाराज ने भी संगीत प्रेमियों के आग्रह पर तिहाइयां लगाईं। संचालन रीता शुक्ला ने किया। कलाकारों का स्वागत किया संगीता सिन्हा ने।
इनसेट
तीन दिनी कथक कार्यशाला आरंभ
वाराणसी। दुर्गाकुंड स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय में रविवार की दोपहर बाद शुरू हुई तीन दिनी कार्यशाला में नृत्य गुरु बिरजू महाराज ने कथक की बारीकियां सिखाईं। उनकी शिष्या शास्वती सेन ने ताल धमार के अलावा तीन ताल में आमद, उठान, टुकड़ा के अलावा परनों की बारीकियों के बारे में प्रशिक्षुओं को जानकारी दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें