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वरुणा पर संकट, जलस्तर गिरा

Sat, 29 Mar 2014 05:31 AM IST
Varanasi
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वाराणसी। अतिक्रमण और फैक्ट्रियों के कचरे से अस्तित्व का संकट झेल रही वरुणा शुक्रवार को विभागीय लापरवाही की भेेंट चढ़ गई। जिस वरुणा को बचाने के लिए ज्ञानपुर कैनाल से गंगा का पानी छोड़ा गया था वही वरुणा पुराना पुल का गेट नंबर तीन टूटने के कारण आधी रह गई। लगातार पानी बहने के कारण वरुणा का जलस्तर 14.5 मीटर से घटकर छह मीटर पर आ गया है। जलस्तर में गिरावट रात में भी जारी थी। उधर, पानी के तेज बहाव के कारण सराय मोहाना पर बना लकड़ी का पुल भी बह गया। इससे करीब एक दर्जन गांवों का शहर से संपर्क टूट गया। फाटक टूटने का कारण वरुणा में नहर से पानी छोड़ा जाना बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि टूटा गेट बनाने में सात दिन लगेंगे।
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सिंचाई के लिए वरुणा में पानी को रोकने के लिए पुराना पुल के नीचे सात फाटक लगाए गए हैं। सुबह साढ़े नौ बजे फाटक संख्या तीन अचानक टूट गया। फाटक टूटने से पानी के तेज बहाव के चलते दो मछुआरे बह गए। लेकिन तैरना जानने के कारण दोनों कुछ दूर बाद सकुशल बच निकले। वहीं पानी की तेज धारा में सराय मोहाना में बना लकड़ी का पुल बह गया। ग्रामीणों ने नावें लगाकर पुल बनाने की कोशिश की लेकिन दो नावें भी बहकर गंगा की तरफ चली गईं। पुल टूटने से कोटवां, राजापुर, दांतेपुर, रमचंदीपुर, चांदपुर, सिवार, रैपुरा, कमौली, मुस्तफाबाद, गौरा समेत एक दर्जन गांवों का शहर से संपर्क टूट गया। इन गांवों के लोग इसी पुल से फूल, माला और सब्जियां लेकर शहर में बेचने के लिए आते थे। अब ग्रामीणों को 12 किमी का चक्कर लगाकर शहर आना पड़ेगा। उधर, पुराना पुल पर तैनात चौकीदार बाबूलाल ने घटना की जानकारी अधिकारियों को दी। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता महेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। उनका कहना है कि फाटक दुरुस्त कराने सात दिन लगेंगे।

मंत्री के दबाव में छोड़ा था पानी
वाराणसी। वरुणा का बेहद प्रदूषित पानी गंगा में गिर रहा था। इस पर एक राज्य मंत्री ने वरुणा को साफ करने के लिए ज्ञानपुर प्रखंड नहर से पानी छोड़ने का निर्देश दिया। एक सप्ताह पूर्व नहर में पानी छोड़ा गया। इससे पुल का पहले से ही जर्जर गेट टूट गया।
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सातों फाटक हैं जर्जर
वाराणसी। पुराना पुल के सातों गेट जर्जर हैं। करीब सात महीने पहले टूटे फाटक नंबर चार को बैराज यांत्रिक खंड ने ठीक करा दिया लेकिन दूसरे जर्जर गेट पर ध्यान नहीं दिया। अधिकारियों का कहना है कि फाटकों की मरम्मत के लिए शासन से धन नहीं मिला है।

1956 में हुआ था शिलान्यास
वाराणसी। पुराना पुल का इतिहास नामी हस्तियों से जुड़ा है। तीन फरवरी 1956 में पंडित कमलापति त्रिपाठी ने इसका शिलान्यास किया था। 28 दिसंबर 1956 को तत्कालीन मुख्यमंत्री संपूर्णानंद ने इसका उद्घाटन किया। इसके निर्माण में 15.5 लाख रुपये की लागत आई थी। निर्माण के बाद से सिंचाई विभाग ने पुल के फाटकों की मरम्मत नहीं कराई। इससे सातों फाटक जर्जर हो गए हैं। ध्यान न दिया गया तो कभी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
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