वाराणसी। रविवार को दस कलाकारों ने तुरही वाद्ययंत्रों से ऐसा समां बांधा कि उपस्थित हर कला प्रेमी झूम उठा। इसी के साथ अस्स ी घाट पर चल रहे विलुप्त कलाओं के संयोजन व संवर्धन संबंधी दो दिवसीय कार्यक्रम संपन्न हो गया। विलुप्तोन्मुख लोक कला संवर्धन समिति के इस कार्यक्रम में बीएचयू के छात्रों बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा प्रवक्ता अशोक पांडेय व विशिष्ट अतिथि डॉ. अवधेश मिश्रा व मनीष तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलित किया। अशोक पांडेय ने कहा कि लोक कलाएं भारत की आत्मा हैं जिनसे भारतीयता व यहां की स्ंास्कृति का बोध होता है। इस अवसर पर पलामू बिहार से पधारे दस कलाकारों ने तुरही वाद्य यंत्र के माध्यम से अनोखा प्रदर्शन किया। यह कला आज विलुप्ति के कगार पर है। नट नृत्य की प्रस्तुति के दौरान धोबिया नृत्य पेश किया गया। यह नृत्य भी यदा-कदा ही नजर आता है। इस अवसर पर ढपली व नगाड़े की प्रस्तुति काफी सराहनीय रही। अंत में कवि सम्मेलन हुआ जिसकी अध्यक्षता डॉ. सरोज सिंह तथा संचालन बद्री विशाल ने किया। समारोह में मेयर राम गोपाल मोहले, विधायक अजय राय, डॉ. मंजुलता, मंजू द्विवेदी, उपस्थित रहीं। सभी का स्वागत शुभम तिवारी, अनांद मोहन, शिवम त्रिपाठी, मुकेश पांडेय, लवकुश चौराहे, आलोक त्रिपाठी, विकास मिश्र तथा अभिनव पांडेय उपस्थित रहे। सभी को धन्यवाद जन्मेजय उपाध्याय ने किया।