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ताजिया की जियारत को उमड़ा हुजूम

Sat, 04 Jan 2014 05:46 AM IST
Varanasi
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वाराणसी। तकरीबन सौ साल पुराना कदीमी ताजिया का जुलूस शुक्रवार को दोषीपुरा स्थित बारादरी इमाम बारगाह से अपनी रिवायत के मुताबिक पूरे अदब और एहतेराम के साथ उठाया गया। ताजिया की जियारत करने के लिए अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ पड़ा। ताजिया पर फूल-माला चढ़ाकर मन्नत मांगने के लिए होड़ लगी रही। रास्ते में अंजुमनों की नौहाख्वानी और मातम की बुलंद सदाओं से माहौल गमजदा हो गया था।
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अंजुमन अजादारे हुसैनी के जेरे इंतजाम में अपराह्न तीन बजे उठाए गए ताजिया के जुलूस के साथ अलम भी शामिल था। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ नौहा व मातम करता हुआ शाम सात बजे सदर इमामबाड़ा पहुंचा। जुलूस में अंजुमन जाफरिया, जाफरिया कदीम एवं कारवाने कर्बला समेत कई अंजुमनें शामिल थीं। दूसरे मजहब के लोगों ने भी ताजिया की जियारत की। सदर इमामबाड़े पर मौलाना मेहंदी रजा ने मजलिस पढ़ी। वहीं, जुलूस उठने के पहले मौलाना सैयद जफर हुसैनी ने मजलिस को खिताब करते हुए कर्बला के वाकियात पेश किए।
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शुरू हुई साठे की मजलिस
वाराणसी। अय्याम-ए-गम का आखिरी हफ्ता शुक्रवार से शुरू हो गया। पुरानी अदालत स्थित शब्बीर और सफदर के अजाखाने में आठ दिनों तक चलने वाली मजलिस आरंभ हुई, जिसे मौलाना अब्बास इरशाद नकवी ने खिताब किया। वहीं, सोजख्वानी शेख रिफत अब्बास ने की। संयोजक अनवर काजिम एवं हैदर हुसैन के मुताबिक मजलिस के अंतिम दिन साठे का जुलूस उठाया जाएगा। अमारी, दुलदुल और अलम का यह अंतिम जुलूस होगा। जुलूस के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में तीन मजलिसें होंगी।
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कदीमी शब्बेदारी आज
वाराणसी। अंजुमन हैदरी, चौक की ओर से शनिवार को कदीमी शब्बेदारी का आयोजन किया गया है। दालमंडी स्थित हकीम मोहममद काजिम के अजाखाने में होने वाली इस शब्बेदारी में मौलाना कमर सुल्तान दिल्ली, अजादार हुसैन मुजफ्फरनगर, बेलाल काजमी लखनऊ, जावेद आब्दी और मौलाना अब्बास इरशाद आदि मजलिस को खिताब करेंगे। इसमें 20 से अधिक अंजुमन हिस्सा लेंगी।
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18 ताबूत का जुलूस कल
वाराणसी। रामनगर स्थित टेंगरा मोड़ से रविवार को 18 ताबूतों का जुलूस उठाया जाएगा। मजहर हुसैन रिजवी के संयोजन में उठने वाला यह जुलूस 18 बनी हाशिम का ताबूत नाम से जाना जाता है। बता दें कि कर्बला में शहीद होने वाले 72 लोगों में 18 शहीद इमाम हुसैन के घर के थे। उन्हीं की याद में यह जुलूस उठाया जाता है।
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