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सुनहरा है भारतीय मुक्केबाजी का भविष्य : संधू

Sat, 04 Jan 2014 05:46 AM IST
Varanasi
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वाराणसी। भारतीय मुक्केबाजी टीम के चीफ कोच जीएस संधू लोअर वेट कैटेगरी में बेंच स्ट्रेंथ की बढ़ती ताकत से गदगद हैं। संधू की मानें तो भारतीय मुक्केबाजी का भविष्य सुनहरा है। देवेंद्रो सिंह, शिवा थापा व सुमित सांगवान सरीखे मुक्केबाजों के हालिया प्रदर्शन से उत्साहित संधू ने कहा कि जुलाई में स्काटलैंड के ग्लास्गो में होने वाले कॉमनवल्ेथ गेम्स में मुक्केबाजी में भारत के खाते में पदक की संख्या निश्चित बढ़ेगी। बीएचयू में शनिवार से शुरू हो रही अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित संधू ने शुक्रवार को अमर उजाला से मुलाकात में अपने अनुभव साझा किए।
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संधू ने कहा, ‘ग्लास्गो में भारतीय मुक्केबाजों की झोली में सात से नौ पदक आएंगे। दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को मुक्केबाजी में तीन स्वर्ण पदक मिला था। मगर ग्लास्गो में परिस्थितियां अलग हैं। यहां मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण है। बावजूद इसके पदकों की संख्या बढ़ने को लेकर मैं आश्वस्त हूं। हां मेडल का कलर दिल्ली से कुछ अलग जरूर हो सकता है।’ एक सवाल के जवाब में चीफ कोच ने कहा कि हैवी वेट में मनप्रीत सिंह और सुपर हैवी वेट में सतीश कुमार से भारत को ग्लास्गो में काफी उम्मीदें रहेंगी। मेजबान स्कॉटलेंड के अलावा इंग्लैंड, वेल्स और आयरलैंड की टीमों से भारत को कड़ी चुनौती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि देवेंद्रो सिंह, शिवा थापा, सतीश कुमार और सुमित सांगवान सरीखे युवा मुक्केबाजों ने अपने प्रदर्शन से सुनहरे भविष्य का संकेत दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में इन खिलाडि़यों के दमदार प्रदर्शन के आधार पर मैं कह सकता हूं कि लोअर वेट कैटेगरी (49 केजी, 56 केजी और 75 केजी) में हमारी बेंच स्ट्रेंथ मजबूत हुई है। संधू में एशिया में कोरिया, कजाखस्तान, उजबेकिस्तान और चीन को मजबूत प्रतिद्वंद्वी बताया। मुक्केबाजी की नर्सरी की बाबत संधू ने कहा कि छोटे शहरों में प्रतिभाओं की भरमार है। जरूरत है कि स्कूल स्तर पर ऐसी प्रतिभाओं को एक्सपोजर का मौका मिले।
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