वाराणसी। डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या के बाद सुर्खियों में आए इनामी बदमाश रमेश काका के मऊ की अदालत में सरेंडर से पुलिस के बड़े अफसरों के कान खड़े हो गए हैं। पुलिस की वे टीमें सवालों के घेरे में हैं, जिन्हें उसकी तलाश में लगाया गया था। एडीजी/आईजी जोन जीएल मीणा भी हैरान हैं कि नेपाल भागने के बाद बदमाश मऊ की अदालत तक इतने सुरक्षित तरीके से पहुंचा कैसे। उसकी तलाश में जुटी पुलिस टीमों को भनक क्यों नहीं लगी। इन सवालों के जवाब के लिए एडीजी ने मामले की जांच का निर्देश जारी कर दिया है। वहीं, डिप्टी जेलर हत्याकांड की बाबत पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच की टीम को मऊ भेजा है।
बता दें कि गुरुवार को पुलिस को चकमा देते हुए इनामी बदमाश रमेश काका ने मऊ की अदालत में सरेंडर कर दिया। इससे नाराज एडीजी/आईजी जोन जीएल मीणा को आशंका है कि 30 हजार का इनामी रमेश काका के सुरक्षित तरीके से कोर्ट में सरेंडर में पुलिस की मिलीभगत है। उसकी तलाश में जिन टीमों को लगाया गया था, उन्होंने पहले बताया था कि सराय लखंसी इलाके में हत्या की दो घटनाओं के बाद काका नेपाल में छिपा हुआ है। एडीजी ने पुलिस टीमों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि नेपाल से मऊ की अदालत तक आने के दौरान पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? एडीजी ने कहा कि इस मामले में पुलिस की लापरवाही की जांच की जाएगी।
रमेश काका के खिलाफ विभिन्न जिलों में 55 मुकदमे दर्ज हैं। उसके डर के चलते मऊ का एक परिवार कोलकाता में रह रहा है। पुलिस को शक है कि डिप्टी जेलर हत्याकांड में उसका हाथ हो सकता है। क्योंकि, डिप्टी जेलर अनिल त्यागी से उसका सिम कार्ड को लेकर विवाद हुआ था। इस मामले में पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच की एक टीम मऊ भेजी गई है। एडीजी ने बताया कि जरूरत पड़ने पर उसे रिमांड पर लिया जाएगा। यह भी जांच की जाएगी कि रमेश काका फरारी के दौरान किन-किन लोगों के संपर्क में था।