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विश्वनाथ मंदिर के विग्रहों के लिए प्रशासन खरीदेगा फूल

Wed, 27 Nov 2013 05:43 AM IST
Varanasi
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वाराणसी। विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थित विग्रहों की पूजा के लिए अब प्रशासन फूल खरीदेगा। अब तक बाबा की पूजा के अलावा अन्य विग्रहों पर अर्पित करने के लिए फूल प्रशासन नहीं मंगाता था। श्रद्धालुओं की मालाओं से ही सभी विग्रह सुशोभित हो रहे थे। यह निर्णय प्रमुख सचिव धर्मार्थ नवनीत सहगल की मौजूदगी में मंगलवार की दोपहर मंदिर के विस्तारीकरण पर हुए मंथन के दौरान लिया गया। बहुप्रतीक्षित विस्तारीकरण योजना को मूर्त रूप देने के लिए प्रमुख सचिव ने मंदिर परिसर का जायजा लिया और आसपास के भवनों की खरीद की दिशा में बरती जा रही उदासीनता पर नाराजगी भी जताई। कहा कि जब तक एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट नहीं आ जाएगी, तब तक शिखरों को स्वर्ण मंडित करने की दिशा में कदम नहीं उठाए जाएंगे।
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मंदिर परिसर के अतिथि गृह में दोपहर साढ़े 12 से दो बजे तक हुई बैठक में मंदिर के विस्तारीकरण पर गहन मशविरा किया गया। प्रमुख सचिव धर्मार्थ ने कहा कि मंदिर से लगे आसपास के भवनों को खरीदने के लिए अफसर भवन स्वामियों से संपर्क करें। उन्होंने आग्रह किया कि जो लोग आसपास के जर्जर भवनों को बेचना चाहते हैं वो मुख्य कार्यपालक और अपर कार्यपालक से अपनी इच्छा व्यक्त कर सकते हैं। मंदिर परिसर में स्थित विग्रहों में तारकेश्वर, भुवनेश्वर, अविमुक्तेश्वर, सत्यनारायण, पार्वती, अन्नपूर्णा, दंडपाणि, बैकुंठ महादेव के लिए फूलमाला मंदिर प्रशासन की ओर से खरीदने पर सहमति बनी। अभी तक ये विग्रह भक्तों की फूलमाला से गुलजार होते थे। इसके अलावा शिखरों की भार क्षमता जानने के लिए जो एक्सपर्ट कमेटी गठित की गई है उसकी पड़ताल में तेजी लाने पर भी जोर दिया गया। न्यास अध्यक्ष ने कहा कि जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक शिखरों को स्वर्ण मंडित कराने की दिशा में कदम नहीं उठाया जाएगा। न्यास अध्यक्ष ने अपना कैंप कार्यालय भी स्थापित करने की जानकारी दी। कैंप कार्यालय में वे महीने में पांच दिन श्रद्धालुओं, पुजारियों, सेवादारों की समस्याओं को सुनने और निदान करने की दिशा में काम करेंगे। बैठक में मुख्य कार्यपालक सुशील कुमार मौर्या, अपर मुख्य कार्यपालक पीएन द्विवेदी, न्यास के सदस्य उमाशंकर पोद्दार भी उपस्थित थे।


इनसेट
रोटेशन ड्यूटी का सख्ती से कराएं पालन
वाराणसी। पुजारियों की रोटेशन ड्यूटी का कड़ाई से पालन कराने का निर्देश दिया गया। प्रमुख सचिव की मौजूदगी में तय हुआ कि गर्भगृह में दो पुराने पुजारियों के साथ एक नए पुजारी की ड्यूटी लगाई जाएगी, ताकि वह गर्भगृह की पूजा के लिए प्रशिक्षित हो सके।
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